आशीष अग्रवाल
सर, मुझे मेरा गुनाह कबूल है। इस एक लाइन की स्वीकारोक्ति ने मुंबई की भरी अदालत को भौचक्का कर दिया। ये कबूलनामा एक ऐसे शख्स का है जिसने आठ महीने तक जांचकर्ताओं की पूरी टीम के छक्के छुड़ा रखे थे।
अपनी बाहियात बातें और बेशर्म अट्टाहासों से आठ महीने तक यही शख्स अदालत का मजाक भी बना रहा था। लेकिन 26/11 के मुंबई हमलों के आरोपी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के दीपालपुर तहसील स्थित फरीदकोट के निवासी 21 वर्षीय मोहम्मद अजमल आमिर कसाब ने अचानक अपना गुनाह कबूल करते हुए अदालत से अपने लिए सजा की गुजारिश कर डाली।
26/11 के मुंबई हमलों को कौन भूल सकता है। वहशत के वो तीन दिन। 60 घंटे तक देश की आर्थिक राजधानी पाकिस्तान की एक और घिनौनी साजिश का शिकार हुई। आतंकवादियों ने न केवल निर्दोश मासूम 180 देशी विदेशी नागरिकों को अपनी हैवानियत का शकार बनाया वरन एटीएस चीफ हेमंत करकरे और दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विजय सालसकर और अशोक कामटे को भी अपना निशाना बनाया। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने हमले से जुडे बाकी आतंकवादियों को मार गिराया था किंतु बड़ी सफलता तब मिली जब इसी अजमल कसाब को जीवित पकड़ा जा सका। आज उस घटना को आठ माह व्यतीत हो चुके हैं। लेकिन पाकिस्तान का धूर्त उत्पाद कसाब कल तक जांच एजेंसियों और अदालत तक को गुमराह करता रहा।
पहले हम बात करते हैं अदालती कार्रवाई की। विशेष अदालत में कसाब से जज एम एल टहलियानी ने जब पूछा कि आपने अचानक क्यों कन्फेस किया जब पहले चार्ज फ्रेम हुए तब क्यों नहीं किया?
कसाब - पहले पाकिस्तान ने नहीं माना कि मैं उनका हूं। आज मान लिया इसलिए बयान दे रहा हूं।
जज - आपको कैसे पता चला कि पाकिस्तान ने मान लिया है ?
कसाब - मैंने सुना कि पाकिस्तान ने कहा है कि कसाब यहां का है।
जज - क्या तुम किसी तरह के दबाव में हो बयान देने के लिए ?
कसाब - नहीं ।
इतना ही नहीं कसाब ने अपने बयान में यह भी बताया है कि किस तरह उसने पाकिस्तान में ट्रेनिंग ली, कैसे वह कराची से होता हुआ मुंबई आया, उसके कौन कौन साथी थे और कैसे उसने सीएसटी और कामा अस्पताल में बम बरसाए और सबसे अहम इस हमले का मास्टरमाइंड कौन था। कल तक सब कुछ सामान्य चल रहा था। पाकिस्तान कसाब के पाकिस्तानी नागरिक होने से भी बार बार इनकार कर रहा था। पाकिस्तान जांच कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए भारत से 26/11 के मुंबई हमलों के पीछे पाकिस्तानी हाथ होने के और ज्यादा पुख्ता सबूत देने की भी मांग कर रहा था। और उसी का प्यादा कसाब भी कल तक खुद अपने आप को पाक साफ बता कर पाकिस्तानी होने से भी इनकार कर रहा था।
दो दिन पहले हिलेरी क्लिंटन भारत आती हैं और सब कुछ बदल जाता है। आज वही कसाब अपने आपको पाकिस्तानी नागरिक होने की बात कह रहा है। कल तक अपने को निर्दोश बताने वाला मुंबई हमलों के राज खोल रहा है। कूटनीतिक हलकों में भले ही इसे भारत की न्यायिक व्यवस्था की जीत बताया जा रहा है लेकिन कहीं कुछ ऐसा तो है जिसकी बू इस कबूलनामे से उठती नजर आ रही है।
क्योंकि ये स्वीकारोक्ति इस मायने में खास है जब अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भारत के दौरे पर हैं। सोमवार को ही हिलेरी ने भारतीय विदेश मंत्री एस एम कृष्णा के साथ आतंकवाद और पाक पर चर्चा की। इसमें साफ तौर पर हिलेरी ने आतंकवाद के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्वता दर्शाते हुए अमेरिकी पक्ष को उजागर किया। हालांकि इससे एक दिन पूर्व वे पाकिस्तान को आतंकवाद का वैश्विक सिंडीकेट बता चुकी थी। हालांकि कसाब के कबूलनामे से कई प्रकार की आशंका जाहिर की जा रही हे। इसके बावजूद भारत के लिए आतंक के खिलाफ कूटनीतिक मंच पर कसाब का यह बयान काफी महत्व रखता है।
जैसा कि हर बार होता आया है पाकिस्तान का रवैया इस मामले में भी चिरपरिचित रहा है। बडी बेशर्मी से पाकिस्तान के रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख्तार ने इस बयान की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है 'कसाब ने अपनी खाल बचाने के लिए यह बयान दिया है जिसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है। ऐसे आदमी के बयानों की कोई विश्वसनीयता नहीं होती जो बार बार अदालत में अपना बयान बदलता हो।
आतंकी घटनाओं के हालिया 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों के सिलसिलेवार धमाके, 19 फरवरी 2007 को समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट, 2007 में हैदराबाद की मक्का मिस्जद में बम धमाका, उत्तरप्रदेश की अदालतों में धमाके, 13 मई 2008 को जयपुर बम विस्फोट, 25 जुलाई 2008 को बंगलौर और फिर दिल्ली में हुए बम विस्फोटों में पाकिस्तान की संलिप्तता रही है। हर बार भारत सरकार पाकिस्तान को पुख्ता सबूत देती रही है और हर बार पाकिस्तान बेहयाई से उन्हें झुंठलाता रहा है।
पाकिस्तान की सीनाजोरी तो यह भी है पाकिस्तान के किसी भी शहर में हुए बम धमाको में वह उल्टा भारत की भूमिका को इंगित करने की कोशिश करता रहा है। हालांकि सारी दुनिया पाकिस्तान के दोगले चरित्र को अच्छी तरह जानती समझती है। लेकिन अमेरिका की वजह से भारत का पक्ष वैश्विक मंच पर कमजोर पड़ जाता है जो एशिया में अपना दबदबा कायम रखने की रणनीति के तहत कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान को शह दे रहा है। आर्थिक मामलों में अमेरिका पर निर्भरता से भी भारत को अमेरिकी फैसलों में अपनी सहमति की जबरन मुहर लगानी पडती है।
हिलेरी का भारत आगमन और कसाब के कबूलनामा इनके मघ्य इन तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि किस प्रकार पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के पीछे अमेरिका का दबाव हावी है। हर आतंकी घटना की तरह 26/11 की घटना के बाद से ही पाकिस्तान ने कभी ये नहीं माना कि वो इसके पीछे जिम्मेदार है। कसाब ने भले ही अपने बयानों में सच्चाई जाहिर की हो लेकिन पाकिस्तान कभी नहीं मानेगा कि आतंकवाद के लिए वो जिम्मेदार है। भारत को असल सफलता तो उस दिन मिलेगी जिस दिन पाकिस्तान भी इसी तरह अपना गुनाह कबूल कर लेगा कि भारत को अस्थिर करने के लिए वह अपने जन्म के साथ ही लगातार गुनाह-दर-गुनाह करता आ रहा है।
(शब्दार्थ)