गोर्श्कोव को ले कर भी रूसी ब्लैक मेल जारी

डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 4 जुलाई- विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्श्कोव की कीमत का विवाद अभी सुलझा भी नहीं था कि रूस ने अब भारत को लीज पर दी जाने वली परमाणु पनडुब्बी नेरपा की कीमत को भी एक अरब डॉलर से अधिक बढ़ाने की भूमिका बनानी शुरू कर दी है।
इतना ही नहीं, आकुला श्रेणी की इस पनडुब्बी में नवम्बर 2008 में हुए हादसे की जांच रिपोर्ट भी अधर में लटकने से इस पनडुब्बी की भारत को इस साल सुपुर्दगी की सम्भावनाएं धूमिल पड़ गई हैं।
लगातार देरी के बाद उम्मीद की जा रही थी कि भारत को यह पनडुब्बी इस साल मई में मिल जाएगी, लेकिन उसके समुद्री परीक्षण के लिए तैयार होना तो दूर रहा, इसके हादसे की तहकीकात भी पूरी नहीं हो पाई है। भारतीय नौसेना में दस साल की लीज पर इस पनडुबबी को आईएनएस चक्र नाम से शामिल किया जाना था और सूत्रों के अनुसार इसकी कीमत 65 करोड़ डॉलर तय हुई थी। लेकिन इस सौदे के साथ नजदीकी से जुड़े भारतीय नौसेना के सूत्रों ने कहा कि एडमिरल गोर्श्कोव की तरह ही रूस ने पनडुब्बी की कीमत बढ़ाने के लिए भी भूमिका तैयार कर ली है।
पनडुब्बी का निर्माण करने वाले आमूर शिपयार्ड ने आर्थिक संकट का बहाना लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं और सूत्रों के अनुसार शिपयार्ड अधिकारियों ने सरकार को यह सूचित कर दिया है कि एक अरब रूबल से अधिक की पेशगी के बिना वह पनडुब्बी की मरम्मत पर काम नहीं शुरू करेगा। शिपयार्ड ने यह भी कहा है कि पनडुब्बी की कमिशनिंग के काम में छह से सात अरब रूबल और लगेंगे।
सूत्रों ने इशारा किया कि भारत इस पनडुब्बी के निर्माण्ा में आंशिक योगदान करता रहा है और अगर इस पर शिपयार्ड सात अरब रूबल अधिक खर्च की बात की बात कह रहा था, तो बेशक इसमें से लगभग आधी राशि की मांग रूस जरूर भारत से करेगा। पूरी सम्भावना है कि भारत में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने पर रूस अपनी मांग नई सरकार के समक्ष रखेगा।
सूत्रों ने कहा कि 12 हजार टन की इस पनडुब्बी के जापान सागर मे समुद्री परीक्षण के दौरान जहरीली गैस रिसने से हुई 20 लोगों की मौत के मामले की जांच मार्च तक पूरी हो जानी थी, लेकिन घटिया गैस की आपूर्ति करने वाली फर्म का पता नहीं लग पाने से मामला अधर में लटका हुआ है।
भारतीय नौसेना के तीन जत्थे इस पनडुब्बी के संचालन के लिए सेंट पीर्सर्ब के पास सोसनोवी बोर में बनाए गए विशेष प्रशिषण केंद्र में ट्रेनिंग हासिल कर चुके हैं और गत फरवरी में भी भारतीय नौसेना के एक प्रतिनिधिमंडल ने रूस जाकर पनडुब्बी की सुपुर्दगी की प्रगति की समीक्षा की थी। नेरपा का कोड नाम आकुला-2 है और यह सबसे उन्नत हमलावार पनडुब्बी है। इसका निर्माण 1991 में शुरू हुआ था, लेकिन धन के अभाव में इसका निर्माण एक दशक तक अटका रहा था।
आकुला-2 श्रेणी की यह पनडुब्बी बेहद संघातक है और इसमें 650 एमएम. के 12 तारपीडो और 533 एमएम. के 28 तारपीडो लगे हैं तथा इनके स्थान पर क्रूज मिसाइलें और अन्य अनेक सबमर्सिबल अस्त्र लगाए जा सकते हैं।भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने के बाद इस पर 300 किलोमीटर तक मार करने वाली परमाणु मिसाइल तैनात किए जाने की योजना है।
भारत ने पहले भी रूस से चार्ली श्रेणी की पनडुब्बी 1988 से 1991 तक लीज पर ली थी और इसे भी भारतीय नौसेना में आईएनएस चक्र नाम से शामिल किया गया था। भारत अपने खुद की परमाणु पनडुब्बी भी विशाखपत्तनम में एटीवी (एडवांस्ड टैक्नोलॉजी वैसल) नाम से विकसित कर रहा है और रक्षामंत्री एके. एंटनी कह चुके हैं कि इसे अब कभी भी समुद्र में उतारा जा सकता है। सूत्रों ने संकेत किया कि रूस ने एडमिरल गोशर्कोव की कीमत भी सेवमाश शिपयार्ड की ओर से मांग उठाने पर बढ़ाने की बात कही थी।दोनों देशों के बीच इस विमानवाही पोत की कीमत नए सिरे से तय करने के लिए कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन दोनों पक्ष सहमति से कोसों दूर हैं।
रूस ने कहा है कि हाल ही में हादसे का शिकार हुई परमाणु पनडुब्बी नेरपा के सौदे के बारे में उसकी भारत के साथ कभी कोई बातचीत नहीं हुई। रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने संवाद समिति आरआईए नोवोस्ती को बताया, रूस ने भारत के साथ नेरपा पनडुब्बी की आपूर्ति के अनुबंध पर बातचीत नहीं शुरू की है।
रक्षा विशेषज्ञ कहते रहे हैं कि रूस अपने सामरिक उपकरणों की बिक्री या आदान-प्रदान के बारे में सार्वजनिक स्वीकारोक्ति करने से बचता रहा है। हाल ही में रूसी रक्षा मंत्री अनातोली सेर्दूकोव जब नई दिल्ली गए थे तो उन्होंने रूसी परमाणु पनडुब्बी के भारत को सुपुर्द करने के बारे में पूछे गए सवाल को टाल दिया था। उनका कहना था कि वह मीडिया में आने वाली खबरों पर टिप्पणी नहीं करते।
इस पनडुब्बी पर समुद्र में परीक्षण के दौरान पिछले शनिवार को आग बुझाने वाली गैस का रिसाव हो जाने से 20 लोगों की मौत हो गई थी। उधर रूस के इस दावे के विपरीत कुछ रिपोर्टों मर् रूर्सी विशेषज्ञों ने हादसे के वक्त पनडुब्बी पर भारतीय नौसैनिकों की मौजूदगी की संभावना से इंकार नहीं किया है। इन रिपोर्टों मर् र्कहा गया है कि अतीत में भी इस तरह के सौदों से पहले खरीदे जाने वाले साजो सामान की जांच पड़ताल के दौरान भारतीय प्रतिनिधि वहां मौजूद रहे हैं। इन रिपोर्टों मर् र्यह भी कहा गया है कि भारत को यह पनडुब्बी वर्ष 2009 में दी जानी थी।
 

Copyright @ 2009, Datelineindia.com   Powered by eMag Technologies Pvt.Ltd.