कॉमनवेल्थ में भ्रष्टाचार का स्वर्ण पदक भारत

सुप्रिया रॉय
डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 29 जुलाई - कॉमनवेल्थ खेलाें की तैयारी अब जी तोड़ और कमर तोड़ मेहनत कर के हो रही है। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा है कि दिन रात काम होना चाहिए मगर कॉमनवेल्थ खेल भारत के लिए शर्म का सबसे बड़ा उत्सव होने जा रहा है।

कॉमनवेल्थ खेल में दुनिया के बड़े स्टार खिलाड़ी नहीं आ रहे हैं। 31 देशों का एक निगरानी मंडल आएगा जो यह तय करेगा कि भारत इतना खेल समारोह करने के हालत में है भी या नहीं। लेकिन बाहर की जांच की जरूरत नहीं हैं। भारत के केंद्रीय सतर्कता आयोग ने इस खेल समारोह की पूरी पोल खोल दी है और बताया है कि इसमें अपार और हर सीमा पर और हर स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है और हो सकता है कि कॉमनवेल्थ भारत का सबसे बड़ा आर्थिक घपला बन कर सामने आए।

केंद्रीय सतर्कता आयोग की लगभग तैयार हो चुकी और हमारे पास उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने पाया है कि कॉमनवेल्थ आयोजित करने के लिए काम कर रही लगभग सभी संस्थाओं ने टेंडर के नियम तोड़े हैं और ठेकेदारों के कहने पर अनाप शनाप भाव बढ़ाए है। जाहिर है कि कमाई सिर्फ ठेकेदारों ने नहीं की। दो साल पहले जिस कंपनी के साथ कैंटरीन यानी खाना सप्लाई करने का करार हो चुका था, जिसके लिए डाइनिंग हॉल और विशेष रसोई घर बनाए गए थे, उस कंपनी को अचानक सुरेश कलमाडी ने बाहर कर दिया। अगली कोई कंपनी सामने आ नहीं रही और इतना वक्त बचा नहीं है कि टेंडर निकाल कर नई कंपनी को काम करने का ठेका दिया जाए। या तो कॉमनवेल्थ में आने वाले दो कौड़ी का खाना खाएंगे या भूख ज्यादा लगने पर ढाबों में लाइन लगाते नजर आएंगे।

सतर्कता आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि रेट बढ़ाने के बाद और स्तर पर हर जगह समझौता करने के बाद भी स्टेडियम या दूसरे जगहों काम ठीक से नहीं हुआ। गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं हैं और अधिकारियों को दिखाने के लिए तंबू और टीन की छते लगा कर दिखा दी गई। गर्मी ज्यादा न लगे इसलिए किराए पर एसी ला कर किराए के जनरेटरों से चलाए गए।

सबसे खतरनाक बात आयोग को जो लगी है वह यह है कि सत्रह में से चौदह इलाकों में बिजली की जो फिटिंग हुई है उनके तारों की जांच तक नहीं की गई और कॉमनवेल्थ को रावण की लंका बनने से रोकना जरा मुश्किल होगा। आयोग के अनुसार बहुत सारे ऐसे सप्लायर्स को ठेका दे दिया गया जिनको पहले ही गलत और घटिया समान सप्लाई करने के आरोप में ब्लैक लिस्ट किया जा चुका था।

आम तौर पर केंद्रीय सतर्कता आयोग शिकायताें के आधार पर काम करता है लेकिन इस मामले में अखबारों और टेलीविजन की रिपोर्ट को आधार बनाया गया और इस रिपोर्ट को सार्वजनिक इसलिए नहीं किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय से आयोग को अनुरोध और निर्देश मिला है कि इतने बड़े खेल समारोह को ले कर दुनिया में भारत के खिलाफ छवि का संकट खड़ा नहीं हो जाए।

मगर एक संकट से अधिकारी निपट नहीं पा रहे हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक मंत्रिमंडलीय समूह खास तौर पर कॉमनवेल्थ खेलों के आयोजन के लिए बनाया गया है। इस समूह की कोई सिफारिश आज तक मानी नहीं गई। सुरेश कलमाडी लगातार इस कोशिश में हैं कि आयोजन का बचाव और जिम्मा भी उन्हें मिल जाए ताकि बचे हुए दो महीनों में वे अपनी जेबें फिर भर सके।

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