माओवादी भारत के शत्रु क्यों नहीं हैं?
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आलोक तोमर
बुधवार को दिल्ली में दिनभर हलचल रही। हलचल जगदलपुर से शुरू हुई थी जहां हमारे गृह मंत्री पी चिदंबरम माओवादियों के अब तक के सबसे बड़े हमले में शहीद हुए जवानों को श्रध्दांजलि देने गए थे। श्रध्दांजलि के बाद सैकड़ों पत्रकारों के सामने गृह मंत्री ने कहा था कि वायु सेना को माओवादियों के खिलाफ युद्व में शामिल किया जाएगा।

वायु सेनाध्यक्ष अहमदाबाद में थे। पत्रकारों ने उन्हें वहां घेरा। उन्होंने कहा कि वायु सेना माओवादी अभियान या ऑपरेशन ग्रीन हंट में शामिल होने नहीं जा रही है। आकाश से जमीन पर हमला तभी किया जा सकता है जब 120 प्रतिशत पक्की जानकारी हो कि जिन पर मिसाइलें दागी जा रही है वे असल में माओवादी ही हैं। अभी तक माओवादियों के बारे में गुप्तचर सूचनाएं विश्वसनीय साबित नहीं हुई है।
भारतीय सेना को ऑपरेशन ग्रीन हंट में शामिल करने से चिदंबरम पहले ही इंकार कर चुके हैं। उनका और उनके जैसे कई विद्वानों का कहना है कि भारत की सेना भारत के दुश्मनों का सामना करने के लिए हैं और वह भारतीय नागरिकों पर हमला नहीं करेगी। इस बयान को ध्यान से देखा जाए तो चिदंबरम साहब की राय में माओवादी भारत के मित्र है, दुश्मन नहीं। इसके अलावा चिदंबरम उस सरकार में भी थे जिसने स्वर्ण मंदिर पर ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत हमला किया था। अभी बरेली में सांप्रदायिक दंगों के दौरान सेना को सड़कों पर उतारा गया था। फिर माओवादियाें के खिलाफ इसका इस्तेमाल क्यों नहीं हो सकता?
चिदंबरम ने वायु सेनाध्यक्ष के बयान के बाद अपना रवैया फौरन बदल लिया है। उन्होंने कहा कि वास्तव में वायु सेना के कार्यक्षेत्र में नागरिक इलाकों में हमले करना नहीं है। वायु सेना मानव रहित विमानों के जरिए इलाके का सर्वेक्षण कर सकती है और पक्की जानकारी दे सकती है। चिदंबरम ने कहा कि वायु सेना की भूमिका के बारे में अलग से विचार होगा।

यह मामला पहली बार नहीं उठा है। पहले भी वायु सेना को ऑपरेशन ग्रीन हंट में शामिल करने के लिए कहा गया था और पिछले वायु सेनाध्यक्ष ने भी इससे इंकार कर दिया था। वायु सेना के दस हैलीकॉप्टर किराए पर लिए गए हैं लेकिन वायु सेना की शर्त के हिसाब से ये सभी हैलीकॉप्टर हत्यारों से लैस हैं। वायु सेना का तर्क है कि ये हथियार और मिसाइलें आत्म रक्षा के लिए लगाई गई है।

बुधवार को शाम होते होते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बयान भी आ गया जिसमें कहा गया था कि अभी तक सेना के किसी भी अंग और खास तौर पर वायु सेना के ऑपरेशन ग्रीन हंट में शामिल करने पर विचार नहीं किया गया है। इसके बाद अगले दिन दिनभर गृह मंत्रालय में चिदंबरम ने जो कहा उसकी सफाई देने का दौर चलता रहा। दरअसल माओवादी अचानक जो हमलावर तौर पर सक्रिय हुए हैं उसका जिम्मा बहुत हद तक खुद चिदंबरम का है। चिदंबरम ने बंगाल के दौरे के दौरान सार्वजनिक रूप से कहा था कि माओवादी कायर है और वे जंगल से निकल कर दिखाएं, उनका सफाया कर दिया जाएगा। उन्होंने तो एक तिथि भी तय कर ली थी कि 2012 तक देश में माओवाद का जड़ से सफाया कर दिया जाएगा। यह एक मनोवैज्ञानिक युद्व हो रहा था जिसे माओवादियों ने चुनौती के तौर पर लिया और पहले दौर में भारत सरकार को करार झटका दे दिया।

वायु सेनाध्यक्ष का कहना है कि तीनों सेनाएं सीमित मार्ग करने के लिए प्रशिक्षित नहीं हैं और हमारे हथियार सीमा के पार मार करने के लिए बने हैं। भारत की सीमाओं में वायु सेना का इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा क्योंकि माओवादी हमारे अपने नागरिक है। वायु सेनाध्यक्ष पी वी नाइक ने अपने पद की इतनी लाज तो रखी कि उन्हाेंने कहा कि अगर सरकार तय कर ले तो वायु सेना इस अभियान में शामिल होगी। इसके पहले थल सेना के अध्यक्ष जनरल वीके सिंह भी लगभग यही बात कह चुके हैं। गृह सचिव जी के पिल्लई ने भी बाद में फिलहाल वायु सेना के इस्तेमाल से साफ इंकार किया।

एक दिन पहले ही गृह मंत्रालय के लगभग सभी अधिकारी चिदंबरम के सुर में बोल रहे थे और कह रहे थे कि सीआरपीएफ के जवानों को माओवादियों ने धोखा दे कर फंसाया और यह गुप्तचर भूल नहीं थी। चिदंबरम रायपुर में बोले कि सीआरपीएफ की बासठवीं बटालियन की पांच प्लाटून दंतेवाड़ा इलाके में माओवादियों के एक प्रशिक्षण शिविर को खत्म करने गए थे और इसी इलाके में अब एक प्रशिक्षण शिविर पूरी सुरक्षा के साथ स्थापित किया जाएगा। हालांकि सीआरपीएफ के अधिकारी अब मंजूर कर रहे हैं कि माओवादियों के प्रशिक्षण शिविर की पक्की जानकारी मिलने पर उसके छह किलोमीटर के दायरे में घेरा डालना चाहिए था मगर मारे गए अधिकारी और जवान पच्चीस किलोमीटर के दायरे में पहुंच गए थे जहां माओवादी ने उन्हें घेर कर मार डाला।

माओवादियों ने यह कत्लेआम कैसे किया, इस बारे में भी अब नई और परस्पर विरोधी सूचनाएं आ रही है। पहले कहा गया था कि बारूदी सुरंग से धमाका करने के बाद बाहर निकले जवानों को गोलियाें से भूना गया और अब कहा जा रहा है कि 76 में से 50 जवान बारुदी सुरंग के विस्फोट में मारे गए। पूरी और सही जानकारी पोर्स्टमार्टम रिपोर्ट से मिलेगी। चिदंबरम जब माओवादी अभियान को बाकायदा युद्व करार दे ही चुके हैं तो सेना को युद्व में इस्तेमाल करने से भारत सरकार को कौन रोक रहा है?
 

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