आलोक तोमर
भारतीय विदेश सेवा की दूसरे दर्जे के अधिकारी माधुरी गुप्ता ने पाकिस्तान में रह कर भारत के खिलाफ पाकिस्तान के लिए जासूसी कर के जो शर्मनाक हरकत की है उसके लिए माफी मिलना संभव भी नहीं है और उचित भी नहीं है। लेकिन इस कथा की शुरूआत करते हैं झूठ बोलने के लिए कुख्यात दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से।
स्पेशल सेल से बयान आया है कि माधुरी गुप्ता को पूर्वी दिल्ली में मयूर विहार के उसके घर से गिरफ्तार किया गया। जबकि विदेश मंत्रालय, रॉ के अधिकारी और सारे सरकारी सूत्र सरेआम कह रहे हैं कि माधुरी गुप्ता के आचरण पर शक होने के कारण इस्लामाबाद में ही उसकी निगरानी की गई और जब शक यकीन में बदल गया तो उसे भूटान में होने वाले सार्क देशों के सम्मेलन की तैयारी के बहाने दिल्ली बुलाया गया और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पकड़ लिया गया।
स्पेशल सेल एक बार मुझे भी पकड़ चुकी है और भरी अदालत में झूठ बोल चुकी है। इस झूठ के बारे में जब अधिकारियों से पूछा गया तो उन्हाेंने कहा कि हवाई अड्डे से हिरासत में ले कर माधुरी गुप्ता को घर ले जाया गया था, तीन दिन तक पूछताछ चली थी और इसके बाद गिरफ्तारी ''दिखाई'' गई थी। चलिए स्पेशल का यह झूठ भी सामने आ गया कि बगैर थाना कचहरी के वह लोगों को बंद रख सकती है। बहुत सारे कश्मीरी दिल्ली में सेफ हाउसों में बंद है।
मगर माधुरी गुप्ता ने जो किया वह अक्षम्य है। माधुरी गुप्ता 2006 और 2007 के बीच इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स में सहायक निदेशक के तौर पर काम करती थी। दिल्ली में बाराखंभा रोड पर सप्रू हाउस में यह ऑफिस हैं। माधुरी गुप्ता ने उर्दू सीखी और बार बार आग्रह किया कि वह पाकिस्तान जाना चाहती है। उसने कहा कि वह पाकिस्तान जा कर देश की सेवा करेगी।
अधिकारियों ने भरोसा किया और माधुरी गुप्ता को इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में द्वितीय सचिव के पद पर तैनात कर दिया। माधुरी गुप्ता ने सबको अपना परिचय प्रेस और सूचना विभाग में उर्दू अनुवादक के तौर पर दिया था। माधुरी गुप्ता अक्सर रातें अपने घर में नहीं बल्कि अज्ञात ठिकानों पर बिताती थी और यहीं से उस पर शक होना शुरू हुआ। उच्चायोग में तैनात रॉ के अधिकारियों ने माधुरी गुप्ता का पीछा किया और उसके फोन टेप करने शुरू किए। उसके पास दो मोबाइल थे और लैपटॉप से वह जो ई मेल भेजती या प्राप्त करती थी उनकी भी निगरानी की गई।
पता चला कि भारतीय राजनयिक माधुरी गुप्ता आईएसआई के दो उन अधिकारियों के संपर्क में थी जो भारत विरोधी प्रकोष्ठ में काम करते थे। रॉ ने विदेश मंत्रालय को जो रिपोर्ट दी है उसके अनुसार माधुरी गुप्ता इन अधिकारियों के साथ रातें भी बिताती थी और भारत स्थित उसके खाते में पैसा भी जमा होता रहता था। अब इन खाताें की जांच पड़ताल की जा रही है।
अपने ही देश की खुफिया जानकारी आईएसआई को मुहैया कराने के आरोप में गिरफ्तार विदेश मंत्रालय की अधिकारी माधुरी गुप्ता को अपने किए पर जरा भी अफसोस नहीं है। उसे पता था कि वह गलत काम कर रही है और एक दिन गिरफ्तार हो जाएगी। जांच अधिकारियों के सवालों के बेबाकी से जवाब देते हुए माधुरी ने कहा कि उसे उम्मीद थी कि भारतीय खुफिया विभाग जल्द ही उस तक पहुंच जाएगा, मगर उसेपहुंचने में दो साल लग गए। पकड़े जाने पर उसने भारतीय खुफिया विभाग के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को माधुरी को भारत बुलाया गया था। इसके बाद उसे नार्थ ब्लॉक स्थित मंत्रालय में बुलाया गया। यहां मंत्रालय और आईबी अफसरों ने उससे पूछताछ की। बाद में उसे दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया गया। पूछताछ करने वाले एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार माधुरी ने सभी सवालों के जवाब बिना लाग-लपेट के दिए। ऐसा नहीं लगा कि उसके मन में कोई भय या पश्चाताप है। एक अन्य अफसर का कहना है कि जिस तरह माधुरी सवालों का जवाब दे रही थी, उससे उसके दिमागी संतुलन पर शक होता है। हो सकता है, उसका स्वभाव ही ऐसा हो। पुलिस अधिकारी इस मामले में रॉ व मंत्रालय के अधिकारियों से भी पूछताछ की संभावना जता रहे हैं।
दिल्ली में माधुरी गुप्ता के जानने वालाें का कहना है कि वह असल में भारतीय सूचना सेवा से भारतीय विदेश सेवा में आई थी और रॉ के इस्लामाबाद में ही मौजूद एक अधिकारी आर के शर्मा के साथ उसके संदिग्ध होने की हद तक अंतरंग संबंध थे। ये शर्मा जी भी अब शक के दायरे में हैं और हो सकता है कि पूछताछ के लिए उन्हें भी हिरासत में लिया जाए।
माधुरी गुप्ता को जब अदालत में पेश करने के बाद तिहाड़ जेल भेजा गया तो उसकी ख्याति पहले ही वहां पहुंच चुकी थी। कैदियों ने उस पर हमला बोल दिया। जेल अधिकारियों ने पिटती हुई माधुरी को जल्दी से एक हाई सिक्योरिटी वार्ड में भेज दिया। माधुरी गुप्ता का दिल्ली के मयूर विहार में जो घर है वहां से भी बहुत कीमती चीजें बरामद हुई हैं। तीन कमरों में तीन एयर कंडीशनर लगे हुए हैं, पूरे घर में कीमती कालीन बिछे हुए हैं, दो कमरों में प्लाज्मा टीवी हैं और कई सिम कार्ड माधुरी के पर्स और घर की दराजों से निकले हैं। इनमें से कुछ सिम कार्ड तो सिंगापुर और दुबई के हैं।
दिल्ली में जब उसे पकड़ा गया तो उसके पास दो मोबाइल मिले और उनमें से एक में पाकिस्तान की एक मोबाइल कंपनी का सिम कार्ड था। यह कार्ड उसे सरकारी तौर पर उच्चायोग की तरफ से दिया गया था और इसका इस्तेमाल उसे सिर्फ उर्दू अखबारों के पत्रकारों से संपर्क करने के लिए था। भारत के लिए माधुरी गुप्ता एक राष्ट्रीय शर्म बन गई है लेकिन यहां एक जरूरी सवाल यह है कि क्या माधुरी गुप्ता से आदेश दे कर उसे जासूसी गतिविधियों में लिप्त होने के लिए कहा गया था या फिर उसे अपने देश से ही अचानक इतनी नफरत हो गई थी कि उसने भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देने का फैसला किया और उसे इस पर कोई शर्म या संकोच भी नहीं है।
विश्व की सबसे चर्चित महिला जासूस माता हरि को गोली से उड़ा दिया गया था और आप अपने कलेजे पर हाथ रख कर पूछिए कि माधुरी गुप्ता के साथ क्या किया जाना चाहिए? मगर एक बात का पता लगाना बहुत जरूरी है कि माधुरी गुप्ता को भारत से इतनी नफरत क्यों हो गई थी कि उसने भारत के खिलाफ पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का रास्ता चुना? यह पता लगाना जरूरी है कि दुनिया भर के उच्चायोगों में माधुरी गुप्ता जैसे कितने देश के दुश्मन और बैठे हैं?