अफजल गुरु को फांसी की सजा होगी?
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आलोक तोमर
डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 19 मई- हालांकि संसद पर हमले करने के मुख्य आरोपी अफजल गुरु की फांसी होगी या नहीं यह तो दूर की बात है लेकिन अब कहानी में एक और दिलचस्प मोड़ दिखाई पड़ने लगा है। अफजल गुरु की फांसी फिर से अटक गई है। जाहिर है सत्र न्यायालय ने 20 अक्टूबर 2006 को अफजल को तिहाड़ जेल में फांसी की सजा सुनाई गई थी।

लेकिन लगभग पांच साल बितने के बाद भी उसे फांसी के फंदे पर लटकाने में केंद्र सरकार को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा है और अभी तक वह जेल में बंद है और उसे फांसी देने पर विचार किया जा रहा है। दरअसल दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना इस मामले से जुड़े दस्तावेज फिर से दिल्ली सरकार को वापस लौटा दिया है और उससे जुड़े कई अहम सवालों का स्पष्टकीरण मांगा है।

संसद हमले के आरोपी अफजल गुरु से संबंधित सालों से रुकी फाइल दौड़ी तो कुछ घंटों में फैसला हो गया। दिल्ली सरकार ने इस मामले पर अपनी राय उपराज्यपाल तेजिंदर खन्ना को भेजी और राजनिवास से एक घंटे में नोटिंग के साथ फाइल वापस दिल्ली सरकार को लौटा दी गई। साथ ही राजनिवास ने दिल्ली सरकार से उसकी टिप्पणी पर कुछ और अहम जानकारियां मांगा है।

अधिकारिक सूत्रों की मानें तो अफजल पर फंदा कसता दिख रहा है। सरकार की राय सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मेल खाती है। हालांकि सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि संसद पर हमले के दोषी को फांसी दिए जाने से कानून व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों पर बारीकी से गौर किया जाना चाहिए। अब दिल्ली सरकार अपनी राय से जुड़ी यह फाइल केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी, जिसके बाद अफजल की फांसी पर अंतिम फैसला होगा।

करीब दो साल से दिल्ली सरकार के पास दबी अफजल की फांसी से संबंधित फाइल दिल्ली सरकार ने मंगलवार को उपराज्यपाल तेजिंदर खन्ना को भेज दी। सरकार की राय को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया और विशेष अधिकारी के माध्यम से फाइल उपराज्यपाल के पास भेजी गई। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक मामले में सरकार की राय का निष्कर्ष यही है कि अफजल को फांसी दिए जाने से सरकार को ऐतराज नहीं है। इस संबंध में आखिरी फैसला केंद्र सरकार को करना है।

उपराज्यपाल ने लगभग एक घंटे के अंदर ही अपनी नोटिंग के साथ फाइल दिल्ली सरकार को वापस भेज दी। इस मामले में पहले ही सरकार की फजीहत हो चुकी है लिहाजा उपराज्यपाल ने तत्काल फाइल लौटा दी, लेकिन राजभवन ने दिल्ली सरकार से इस मामले में कुछ स्पष्टीकरण मांगा है। गृह मंत्रालय की तरफ से दिल्ली सरकार से 16 बार राय मांगी जा चुकी है। सूत्रों ने बताया कि सामान्य प्रक्रिया में जिस भी राज्य की जेल में संगीन मामलों के अपराधी को रखा जाता है, उस राज्य से अपराधी के संबंध में गृह मंत्रालय द्वारा राय ली जाती है। अफजल तिहाड़ जेल में है, इसलिए इस संबंध में दिल्ली सरकार से राय मांगी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अफजल को 13 दिसंबर 2..1 को संसद हमले का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।

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