आलोक तोमर
कुछ महीने पहले बिहार के सिवान में जाना हुआ। एक छोटा सा सोता हुआ कस्बा है और पूरे देश में इस कस्बे का नाम लोग जानते हैं तो शहाबुद्दीन के नाम से। शहाबुद्दीन लंबे गोरे और एक हद तक सुंदर दिखने वाले मनुष्य हैं मगर वे मिस्टर इंडिया नहीं है। कई बार संसद में रह चुके हैं और लालू यादव और नीतिश कुमार दोनों के साथ उठना बैठना रहा है। अब उम्र कैदी है और बाकी मामलों में सुनवाई हो रही है। शहाबुद्दीन के बिहार के इस इलाके का आतंक है।
मगर उस दिन सिवान में सड़क के दोनों ओर सुबह दस बजे के आस पास दस- दस, बीस- बीस की संख्या में लोग खड़े शहाबुद्दीन के गुजरने का इंतजार कर रहे थे। डॉन को जेल से अदालत ले जाया जा रहा था। पुलिस की कैदियों वाली गाड़ी गुजरी और शहाबुद्दीन बाकी कैदियों के साथ उसमें नहीं था। हत्या, अपरण, फिरौती, आतंकवाद और लोगों से वसूली करने वाला यह डॉन एक पुलिस जीप में अगली सीट पर वहां बैठा था जहां अफसर बैठते हैं। बहुत शान से हाथ मिला रहा था और मिठाई की एक दुकान पर रबड़ी का कुल्हड़ तैयार था, गाड़ी रूकी और मुंह मीठा कर के शहाबुद्दीन अदालत रवाना हुए। यह हमेशा की कहानी है।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में जनप्रतिनिधियों के अपराध पर पहले बवाल होता है, कुछ दिन सुर्खियों में खबरे रहती हैं और आखिरकार नई खबरे आ जाती है और पुरानी लोग भूल जाते हैं। एक के बाद एक घोटाले होते रहते हैं। गिरफ्तारी का अभिनय होता हैं। फिर जमानत हो जाती है और मुकदमा अनंत काल तक चलता रहता है। अगर पिछली सदी से शुरू करे तो घपलों और घोटालों की लंबी सूची है जिसमें हमारे महामहिम कहे जाने वाले लोग अभियुक्त हैं। पहले सूची की बात हो जाए।
बहुत साल पहले कांग्रेस के नेता सुखराम के घर छापा पड़ा था। बोरो और टायराें में इतने नोट बरामद किए गए थे कि सीबीआई के लोग एक सप्ताह तक उन्हें गिनते रहे। सुखराम ने कहा कि यह पार्टी फंड का पैसा है। पार्टी ने हाथ झाड़ लिए। भाजपा ने लगभग एक महीने तक इस मुद्दे पर संसद नहीं चलने दी। मगर यही सुखराम बाद में भाजपा के सहयोगी बने और हिमाचल प्रदेश में भाजपा सरकार में शामिल हुए। राजीव गांधी के जमाने का एचडीडब्ल्यू पनडुब्बी घोटाला भी आपको याद होगा और बिहार का चारा घोटाला। कर्नाटक की तांसी भूमि घोटाले को भी आप नहीं भूले होंगे।
नरसिंह राव के जमाने में बाकायदा बहुमत खरीदा गया। नरसिंह राव शुध्द संयोग से राजीव गांधी के हत्या के बाद प्रधानमंत्री बन गए थे वरना राजीव गांधी ने तो उनका लोकसभा का टिकट भी काट दिया था। उस समय वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे और प्रधानमंत्री वाली सीट पर सदन के नेता के तौर पर अर्जुन सिंह बैठा करते थे और नरसिंह राव बगल में। जब विश्वासमत की बात आई तो शिबू सोरेन से सौदा किया गया और झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसदों को वोट तीन तीन करोड़ रुपए में खरीदे गए। सीबीआई ने इस घोटाले का पता लगा लिया और इस बात का भी कि इसमें चंद्रास्वामी और सतीश शर्मा शामिल थे। इस पैसे को ले कर विवाद हुआ और सोरेन पर इल्जाम लगा कि उन्हाेंने अपने सचिव की हत्या कर के लाश फेक दी। सोरेन को जेल भी जाना पड़ा। उस समय वे केंद्र सरकार में मंत्री थे। फिर हुआ यूरिया घोटाला जिसमें किसानाें को खाद की जगह मिट्टी के बोरे भर कर दे दिए गए थे और इसमें भी केंद्रीय मंत्री रामलखन सिंह का नाम आया।
बहुत पीछे जाए तो रॉ के एक अफसर नागरवाला को इंदिरा गांधी ने फोन कर के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की संसद मार्ग शाखा से साठ लाख रुपए 1971 में दिलवाए थे। बाद में बैंक के कैशियर मल्होत्रा ने पता किया तो कहा गया कि इंदिरा जी ने कोई फोन नहीं किया था। नागरवाला पर इल्जाम लगा कि उसने इंदिरा जी की आवाज की नकल की थी जबकि सच यह है कि नागरवाला हकलाता था। जेल में नागरवाला की मौत हुई, जांच कर रहे पुलिस अधिकारी एक सड़क दुर्घटना में मारे गए और मल्होत्रा का मुंह हमेशा के लिए बंद हो गया।
बोफोर्स घोटाला आपको याद होगा। हर्षद मेहता का वह इल्जाम भी आपको याद होगा जिसमें उसने कहा था कि वह खुद नरसिंह राव को एक करोड़ रुपए की रिश्वत देने गया था। जयललिता पर घोटाले के बहुत मामले चल रहे हैं। भाजपा के एक अध्यक्ष को तो रिश्वत लेते तहलका वालों ने कैमरे पर पकड़ा था। सेना के लिए करगिल के दौरान ताबूत खरीदने में हुए घपले में जॉर्ज फर्नाडींज का नाम आया था। ताज कॉरिडोर मामले में सीबीआई अब भी जांच कर रही है मगर कॉरिडोर शान से बन रहा है। अब्दुल करीम तेलगी फर्जी स्टैंप पेपर बेचत था और उसने कई नेताआें के नाम लिए। डीपी यादव जैसे बाहुबली नेता ने अपनी बेटी से प्रेम करने वाले नीतिश कटारा को मरवा दिया। सद्दाम हुसैन से नटवर सिंह और उनके बेटे ने पैसा लिया। जेसिका लाल हत्याकांड में भी भारत के एक भूतपूर्व राष्ट्रपति का नाती पकड़ा गया और मुरादाबाद में चंद्र विजय सिंह नाम के उम्मीदवार ने जमीन घोटाला कर के उस पैसे से वोट खरीदने चाहे।
वॉशिंगटन पोस्ट कहता है कि भारत के पांच सौ चालीस सांसदों में से एक चौथाई बाकायदा अपराधी है। इस सूची में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का नाम आ सकता है। आठ हत्याएं करने वाले विधायक पप्पू कलानी और डॉन अरुण गवली का नाम आ सकता है। उत्तर प्रदेश के 2007 के चुनावों भाजपा के समर्थन से लड़े पवन पांडे के खिलाफ 63 आपराधिक मामले चल रहे हैं। यह सूची मधु कोडा के नाम के बगैर पूरी नहीं होती जो डेढ़ साल में खरबपति बन गया और फिलहाल जेल में हैं। अब्दुल रहमान अंतुले अब केंद्रीय मंत्री है मगर इंदिरा गांधी के नाम पर कूपन बेच कर कमाई करने का इल्जाम उन पर भी लग चुका है। सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 के दंगों में चार्ज शीट दाखिल हो गई हैं। जगह कम हैं और कलंक कथाएं बहुत हैं। बाकी फिर कभी लेकिन एक सवाल का जवाब कलेजे पर हाथ रख कर दीजिए कि आप सब जानते हुए भी क्यों ऐसे लोगों को चुनते हैं जो देश के लोकतंत्र के लिए कलंक साबित होते हैं? दरअसल आप में से ज्यादातर तो वोट डालने ही नहीं जाते और दिनकर की कविता है कि जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध। कृपया तटस्थ होने से बचिए।