सुप्रिया रॉय
कल्पना करें कि हांगकांग के आकाश में एक पतंग उड़ रही है। इस पतंग को अब भारत के कई हिस्सों से न सिर्फ देखा जा सकता है बल्कि उसके रंगों और उसकी डोरी की मोटाई तक बताई जा सकती है। भारत में हाल ही में एक्स बैंड राडार हासिल करने की कोशिश की है और उसके परीक्षण अभी चल रहे है।
ऐसे तो ये रक्षा खरीद की एक मामूली कवर है और आम रक्षा सामग्री की तुलना में ये राडार बहुत महंगे भी नहीं हैं। एक राडार की कीमत स्थापना सहित साठ करोड़ डॉलर पड़ेगी लेकिन इनको खरीदना पड़ा इसके पीछे की कहानी बहुत दिलचस्प और रोमांचक है। पाकिस्तान ने भारत में घुसपैठ और पहाड़ की चोटियों से सोलर दूरबीनों द्वारा नजर रखने के बाद अब खिलौना दिखने वाले वे छोटे विमान खरीद लिए हैं जो खिलौना जैसे होते हैं मगर इसमें मौजूद कंप्यूटर में विमान का रास्ता फीड किया जा सकता है और उस रास्ते में पड़ने वाले सारे ठिकानों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है। ऐसे दो जहाज भारतीय सीमा में आ कर गिरे भी है। इन्हें जासूसी जहाज कहते है।
और तो और अब पाकिस्तान शांति के प्रतीक सफेद कबूतरों पर कोड संदेश और फोन नंबर भी लिख कर भेजने लगा है। ऐसा एक कबूतर पंजाब पुलिस की हिरासत में हैं। इस कोड की जांच की जा रही है और समझने की कोशिश की जा रही है। पकड़े गए कई आतंकवादी और आईएसआई से प्रशिक्षित पाकिस्तानी जासूसों की भी मदद इसमें ली जा रही है। यह कबूतर तो शरीफ था जो आ कर बैठ गया और अपने आपको पकड़े जाने दिया मगर कबूतरों को आप जानते हैं कि सही जगह तक संदेश भेजने के लिए भी प्रशिक्षित किया जा सकता है।
ऐसे में इस एक्स ब्रांड राडार का भारत में होना स्वाभाविक हैं और खरीद की कार्रवाई जितनी जल्दी हो सके, पूरी हो जाए तो अच्छा है। इस राडार की क्षमता 4600 किलोमीटर दूर तक 8 इंच तक का उपकरण या कोई वस्तु देखने की है। अभी तक भारत के पास 1500 किलोमीटर तक नजर रख सकने वाला राडार है। इसे भी इजराइल से आयात किया गया था और अब एक तकनीकी समझौते के तहत इसे भारत में ही बनाया जा रहा है।
एक्स ब्रांड राडार आने से हम चीन की राजधानी बीजिंग की किसी भी इमारत की खिड़की और छतों पर सीधे नजर रख सकते हैं। इतना ही नहीं, प्रमाण और रिकॉर्ड के लिए फोटो खींच कर भी रख सकते हैं और चाहे तो इन फोटों को थ्री डी इमेज भी बना सकते हैं। यह नया राडार भी इजराइल से आ रहा हैं। इस नई आंख का स्वागत हैं क्योंकि इसमें नजर रखने के लिए किसी उपग्रह का सहारा नहीं लेना पड़ता। राडार से तरंगे निकलती है और जहां कहीं भी टिन की छत मिलती है, उससे टकरा कर आगे बढ़ जाती है। लगभग पौने सेकेंड में 4600 किलोमीटर की दूरी में इसे कहीं भी फोकस किया जा सकता है।
भारतीय रक्षा अनुसंधान विभाग 1500 किलोमीटर वाली क्षमता का राडार बना ही रहा है। एक निष्पाप सा प्रश्न यहां पूछा जा सकता है कि इजराइल विज्ञान में बहुत आगे नहीं होने के बावजूद जब इतने अच्छे रक्षा उपकरण बना सकता है तो भारत में क्या बुराई है? एक्स ब्रांड राडार बेचने वाली कंपनी ने तकनीकी आउटसोर्सिंग का सौदा एक अमेरिकी कंपनी से किया है जिसके मुख्य वैज्ञानिक भारतीय मूल के हैं। जब वे अमेरिका में बैठ कर इतने दूर तक देखने वाली तकनीक विकसित कर सकते हैं तो भारत का रक्षा अनुसंधान विभाग ऐसा क्याें नहीं कर सकता?
भारत के रक्षा अनुसंधान विभाग यानी डीआरडीओ में बड़े बड़े और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक रहे है। भूतपूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी इसके मुखिया रह चुके हैं। उन्हें मिसाइल विशेषज्ञ कहा जाता है। दिक्कत यह है कि हमारे रक्षा मंत्रालय का ध्यान विदेशों से रक्षा सामग्री की खरीद में ज्यादा है और अपनी तकनीक विकसित करने में कम। वरना भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी को सागर में उतारने के बाद एक साल पूरा ठीक से काम शुरू करने में क्यो लगता? अग्नि मिसाइल बार बार फेल क्यों होती? एक तरफ हम चंद्रमा तक पहुंचने की बाते कर रहे हैं और दो चंद्रयान छोड़ भी चुके हैं मगर हाल ही में रक्षा उद्देश्याें से अंतरिक्ष में भेजा गया यान तो अपनी कक्षा तक पहुंचने के पहले ही भटक गया क्योंकि उसके तीन इंजन फेल हो चुके थे और चौथा कंट्रोल रूम से कमांड नहीं ले रहा था। करीब 900 करोड़ रुपए कुल मिला कर तीन मिनट में नष्ट हो गए।
एक्स ब्रांड राडार की खासियत यह हेै कि यह एकदम ठीक ठिकाने की जानकारी देता है और धरती से 48 किलोमीटर दूर यानी अंतरिक्ष से होते हुए आ रही मिसाइल को भी नष्ट कर सकता हैं। जब चीन के पास आठ हजार किलोमीटर तक फायर करने वाली मिसाइलें आ गई है और पाकिस्तान ने चीन और उत्तर कोरिया से हत्फ और गौरी मिसाइलें प्राप्त कर ली है जिनसे भारत के दिल्ली तो बहुत पास है, गुवाहाटी तक हमला किया जा सकता है तो ऐसे राडारों की और इससे भी ज्यादा ताकतवर राडारों की हमें जरूरत पड़ने वाली है।
पाकिस्तान के राडारों का निशाना तो भारत के अलावा दूसरा नहीं हो सकता। भारत की मिसाइलों के निशाने पर भी पाकिस्तान है तो उसमें हैरत की कोई बात नहीं है। विचित्र बात यह है कि इजराइल ने ये राडार अमेरिका की ही एक और कंपनी के जरिए बेचने का फैसला किया है। दरअसल इजराइल ने अमेरिका की इस कंपनी से जिसके मुखिया भारतीय हैं, यह तकनीक खरीदी थी और फिर राडार विकसित कर के उसे भारत को ही बेच डाला। भारत को अपनी प्रतिभाओं और खास तौर पर वैज्ञानिक प्रतिभाओ को संजो कर रखना पड़ेगा वरना हम ऐसे ही अपने ही लोगों द्वारा रचे हुए संसाधन खरीदने में विदेशी मुद्रा खर्च करते रहेंगे।
मगर हमारी मानसिकता का क्या किया जाए? भारत की विमान सेवाओं में पायलटों की कमी का रोना लगातार रोया जाता है और अमेरिका तथा उक्रेन तक से पायलट आयात किए जाते हैं मगर भारत मे प्रशिक्षित और पूरी तरह दक्ष पुणे, दिल्ली और फुरसतगंज अमेठी के प्रशिक्षित पायलटों पर कंपनियां और सरकार दोनों ही भरोसा नहीं करती।