जो हम भूल गए हैं!
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आलोक तोमर
भूलना भारत का राष्ट्रीय संस्कार बन चुका है और यही स्मृति दोष हमारा अंतिम संस्कार भी कर सकता है। हम घटनाओ से घटनाआें तक जाते हैं और ऐसा नहीं कि बेरहमी और बेईमानी हमे विचलित नहीं करती हो, हम अगली बड़ी खबर आते ही पिछली बड़ी खबर भूल जाते है। यह पूछने की तो किसी को न आदत है न जरूरत कि बड़े बड़े शीर्षकों और टीवी के पर्दो पर चीखते चिल्लाते मित्रों के जरिए एक खुलासा सामने आता है तो हम सीधे सरकार और देश को धिक्कारने लगते हैं मगर कुछ दिन बाद दूसरा खुलासा आ कर पिछले खुलासे को बंद कर देता है।

कलेजे पर हाथ रख कर सोचिए कि क्या आपको पिछले पच्चीस साल से भोपाल याद था? अब जब लगातार एंडरसन चालीसा पढ़ा जा रहा है और इल्जामों की होली खेली जा रही है तो हमारी आत्मा की किसी काल कोठरी में पड़ी चेतना सवाल कर रही है कि इतनी बड़ी बेईमानी कैसे हुई और इसके दोषियों को सजा क्यों नहीं मिलती? कुछ दिन ठहरिए, ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठके होती रहेंगी और उनकी खबरे धीरे धीरे अंदर के पन्नों पर छपी जाएगी।

घोटालो और पापों की सूची अनंत है और सिर्फ पिछले छह महीने की बात करें तो ऐसे ऐसे काले सच सामने आए हैं कि उन्होने हमे झकझोर कर रख दिया है। दिनांकों से चलेंगे तो बहक जाएंगे इसलिए आप और हम खुद याद करें कि हमने कैसे कैसे लोगों को अपनी विस्मृति के मंच पर खड़ा कर के माफ कर दिया है। अब खबरे आती है तो हम पढ़ लेते हैं जैसे टीवी पर विज्ञापन आते हैं तो हम देख लेते है।

नारायण दत्त तिवारी जो भारत में दो राज्यों के मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना चुके हैं और कुल मिला कर पांच बार मुख्यमंत्री, छह बार केंद्रीय मंत्री और एक बार राज्यपाल बन चुके हैं, ने कम राजनैतिक और नैतिक अनिष्ट नहीं किए। उनके खिलाफ एक अवैध संतान अदालत जा कर पिता का नाम मांग रही है और आंध्र प्रदेश के राजभवन में जो रासलीला उन्होंने रचाई थी और जिसके वीडियो सब जगह उपलब्ध हैं, वह मामला एक पुलिस शिकायत से आगे नहीं बढ़ सका।

इन्हीं तिवारी जी ने अपने एक मंत्री हरक सिंह रावत को उत्तर पूर्व की एक युवती की अवैध संतान के पिता होने के आरोप में मंत्री पद से हटा दिया था। रावत अब उत्तराखंड में प्रतिपक्ष के नेता हैं और कांग्रेस अध्यक्ष बनने का दावा पेश कर रहे हैं। उनके बारे में भी हम जल्दी भूल जाने वाले हैं कि उन्होंने एक दलित परिवार की जमीन पर कब्जा किया है ओैर उनके पास प्रमाण के लिए जो दस्तावेज हैं उनमें 1974 में मर गए एक आदमी के दस साल बाद दस्तखत हुए दिखाए गए हैं।

पाकिस्तान में पकड़ी गई माधुरी गुप्ता तिहाड़ जेल में बंद हैं मगर पाकिस्तान में रह कर भारत के खिलाफ जासूसी करते वक्त किस किस पाकिस्तानी राजनयिक या आईएसआई अधिकारी ने माधुरी गुप्ता का इस्तेमाल किया यह सवाल अब कोई नहीं पूछता। किसी को कोई जल्दी नहीं हैं। न्याय दस, बीस, तीस, चालीस, पचास साल में हो ही जाएगा। भारत ने पाकिस्तान को मुंबई के 26/11 वाले कांड में ग्यारहवां डोजियर सौंपी है और निरुपमा राव पाकिस्तान की यात्रा पर जाने वाली हैं जहां माधुरी गुप्ता काम करती थी।

डॉक्टर केतन देसाई एक बार एक कंपनी से रिश्वत लेते पकड़े गए और उन्हें भारत के चिकित्सा संस्थानों को मान्यता देने वाली सर्वोच्च संस्था मेडीकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। बाद में अदालत ने कहा कि जिस मेडीकल कॉलेज से रिश्वत लेने का आरोप है और वह सही भी है उसे डॉक्टर देसाई ने कभी कोई लाभ नहीं पहुंचाया इसलिए उनकी क्या गलती है? फिर अध्यक्ष बन गए, खुद आचार संहिता बनाई और खुद तोड़ते हुए पकड़े गए। अब जेल में हैं लेकिन दिल्ली के द्वारका इलाके में करोड़ो रुपए के मेडीकल काउंसिल कॉम्पलेक्स में डॉक्टर साहब की तस्वीर हटाने की किसी की हिम्मत नहीं हो रही। क्या पता कब लौट आए?
अपने मधु कोडा को याद करिए जिन्हे भारत का एक मात्र निर्दलीय मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त है। वे झारखंड की एक जेल में पड़े हैं और सिर्फ तीन साल में करीब तीस लाख करोड़ रुपए कमाने और दुबई से ले कर अफ्रीका तक संपत्तियां खरीदने, टीवी चैनलो मे निवेश करने और खुद गिन नहीं सके, इतनी नकदी लॉकरो में छिपाने का आरोप मधु कोडा पर है लेकिन पिछले दिनों झारखंड में जो शिबू सोरेन वाला नाटक हुआ उसे देखते हुए हम नए संस्पेंस मे में उलझ गए और पुराना भूल गए। हम भूल गए हैं कि शहाबुद्दीन और पप्पू यादव जैसे हत्यारे जेल में भी अपनी एक बंधक सरकार चला रहे है।

हम से बहुतो को याद नहीं हैं कि माओवादियों ने जो सबसे बड़े हमले हमारे सुरक्षा अधिकारियों पर किए उन जगहों के नाम दंतेवाड़ा और सिल्दा है। हम भूल गए है कि नटवर सिंह को सद्दाम हुसैन से कांग्रेस के नाम पर करोड़ो रुपए का तेल और गैस लेने का आरोप लगा था और उन्हे सत्ता और राजनीति के अरण्यवास में जाना पड़ा है। हम भूल गए हैं कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में मौजूद एक मंत्री उस बाल्को कारखाने की मालिक वेदांता कंपनी में खुद डायरेक्टर रह चुके हैं, जिसमें घपले ही घपले और मौते ही मौते हेैं। सज्जन कुमार खबरों में हैं क्योंकि अदालत में मामला चल रहा है। हमे धर्मपाल शास्त्री, जगदीश टाइटलर और स्वर्ग सिधार गए हरकिशन लाल भगत के नाम याद नहीं है।

करोगे याद तो बहुत बात याद आएगी और भूलोगे तो जिंदगी हाथ से छूट जाएगी। हम अपनी स्मृति को बचाव की मुद्रा में रख कर खुद अपने और समाज के खिलाफ साजिश रच रहे है और इसका जो भी नतीजा होगा उसके लिए हमी लोग जिम्मेदार होंगे। ये सारे अपराध देश के खिलाफ किए गए हैं और हम इस देश के नागरिक हैं। हमे यह जानने का पूरा अधिकार है कि आखिर गड़बड़ हुई तो हुई कहां लेकिन हमारे पास पूछने का समय हो या इच्छा हो तभी तो हम जा कर सवाल पूछेंगे। जब तक सवाल नहीं पूछेंगे तब तक बड़े से बड़े अपराध के खिलाफ अपराधी ऐश करेंगे और हम निरुत्तर बने रहेंगे। इस साजिश से बचे जो हम अपने खिलाफ ही कर रहे है।