मुस्लिम आतंकवादियों का अभ्यारण्य नहीं रहा मध्य प्रदेश
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आलोक तोमर
मध्य प्रदेश के चंबल घाटी के मुरैना शहर में मुस्लिम आतंकवादी संगठन का एक कमांडर पकड़ा जाएगा यह किसी ने नहीं सोचा। चंबल घाटी के लोग तो अपनी बंदूकों और हत्यारों पर भरोसा करते हैं और बाहर से आने वालो को खदेड़ देते हैं। मगर पिछले साल 27 मई को आठ साल से फरार सिमी का कमांडर इशाक खान पकड़ा गया था और पकड़े जाने पर उसने बताया कि नौ साल पहले 20 मई 2000 को चेन्नई एक्सप्रेस में बम भी उसने रखा था और बम ग्वालियर प्रकाशित होने वाले अखबारो में लिपटा हुआ था इसलिए जाहिर है कि ग्वालियर भी सिमी से मुक्त नहीं है।

आम तौर पर देश का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश और उसके भी मालवा अंचल में स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंंट ऑफ इंडिया- सिमी के अड्डे और हत्यारों के खजाने होंगे यह पहले किसी ने नहीं सोचा था। मगर आतंकवादियों का तो पुराना रवैया है कि जहां उनके होने का किसी को अंदेशा भी नहीं हो, वहीं जा कर रहा जाए। मध्य प्रदेश में सिमी का नेटवर्क काफी मजबूत रहा है और इंदौर के पास एक अड्डा बना कर ये लोग बाकायदा आतंक का प्रशिक्षण्ा दे रहे थे। प्रशिक्षण भी ऐसा वैसा नहीं,। एकदम सेना के गौरिल्ला कमांडो जैसा।

2008 में सिमी के तेरह नेताओं को इंदौर के पास नदी के किनारे उनके अड्डे से पकड़ा गया था। इनमें सिमी का महासचिव सफदर नागौरी और उसका भाई कमरूद्दीन भी था। भोपाल और इंदौर के बीच और भोपाल से पैतीस किलोमीटर दूर चोराल नाम की रमणीक जगह पर भी सिमी का एक और अड्डा था जहां केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मुस्लिम आतंकवादी प्रशिक्षण लेते थे और इसमें इस्लामिक मुजाहिदीन जैसे खतरनाक संगठन के लोग थे। यहां जब छापा मारा गया तो सिमी के कर्नाटक चीफ हाफिज हुसैन और केरल में सिमी का संयोजक कमरूद्दीन कापड़िया भी पकड़ा गया। कापड़िया की तलाश अहमदाबाद में हुए धारावाहिक धमाकों के अभियुक्त के तौर पर की जा रही है।

इसके बाद आजमगढ़ का रहने वाला और जयपुर, अहमदाबाद में दर्जनों लोगों की जान लेने वाला सैफ उर्र रहमान भी जबलपुर से पकड़ा गया। ये लोग मध्य प्रदेश में आ कर बसे थे और अपना पूरा कर्तव्य कर रहे थे इससे जाहिर है कि इन्हें मध्य प्रदेश बहुत ज्यादा सुरक्षित लग रहा था लेकिन ये पकड़े गए इससे जाहिर है कि मध्य प्रदेश में सरकार आंख बंद कर के नहीं बैठी है। हालांकि इसका कोई राजनैतिक अर्थ नहीं हैं मगर 1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश में आतंकवादियों और मुस्लिम खूनी संगठनो का असर लगातार बढ़ा। इसे आप संयोग कह सकते हेैं कि इस दौरान प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने जब छापे मारे तो खरगौन जिले के झीरामिया गांव से अपार विस्फोटक और आधुनिक हथियार बरामद हुए। संयोग से यहं गांव उस सोहराबुदीन शेख का घर है जिसको फर्जी मुठभेड़ में मारने के मामले में नरेंद्र मोदी की सरकार अब तक फंसी हुई है। यहां तो आधुनिक हथियार बनाने और देशी हथियारों को आधुनिक बनाने का बाकायदा एक अड्डा बन गया था।

शिवराज सिंह सरकार के सामने विकास आदि को छोड़ कर दो बड़ी चुनौतियां थी। एक तो माओवादियों ने भी छत्तीसगढ़ सीमा के जिलों खास तौर पर बालाघाट में हथियार बनाने के कई अड्डे बना रखे थे और दूसरे सिमी का जाल पूरे प्रदेश में फैल गया था। सिमी और माओवादियों को मदद देने वालो में भू माफिया और मालवा के मंदसौर इलाके से अफीम की तस्करी करने वाले लोग भी मोटी कीमत पर सहायता बेच रहे हैं। इनमें से कई सिमी और इंडियन मुजाहिदीन कार्यकर्ताओं पर अदालत में मुकदमे चल रहे हैं और ज्यादातर मामलों में गवाह सामने नहीं आ रहे हैं।

इसीलिए मध्य प्रदेश सरकार ने महाराष्ट्र के मकोका की तर्ज पर मध्य प्रदेश में इन मामलाें को जल्दी निपटाने के लिए विशेष अदालते बनाने के इरादे से एक विधेयक पास किया मगर केंद्र सरकर की सहमति इस पर अभी तक नहीं मिली है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के रजिस्टरों में मध्य प्रदेश का नाम अपराध बढ़ने वाले राज्यों में काफी आगे हैं और इसका जवाब मध्य प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री उमा शंकर मिश्रा कहते हैं कि ऐसा इसलिए हेै कि हमारे यहां हर शिकायत एफआईआर के तौर पर रजिस्टर की जाती है। इस बयान को अगर एक तरफ रख भी दिया जाए तो मध्य प्रदेश सरकार अपनी पुलिस को आधुनिक और समकालीन बनाने के लिए केंद्र सरकार से हथियारों और प्रशिक्षण के लिए लगातार मदद मांग रही है मगर इसका क्या किया जाए कि मध्य प्रदेश में सरकार भाजपा की हैं और केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए की जिसके गृह मंत्री चिदंबरम तो माओवादियों को भी आतंकवादी नहीं मानते।

भारत सरकार के रिकॉर्ड में ही लिखा है कि सिर्फ 2009 के साल में सिमी के लोगों ने नवंबर में तीन लोगों की हत्या की और पुलिस पर गोलियां चलाई। नवंबर में ही जबलपुर से सिमी के तीन बड़े हत्यारे पकड़े गए। अक्टूबर में इंदौर शहर से सिमी के पांच लोग पकडे गए जिनमें से दो मोहम्मद शफीक और मोहम्मद युनूस महाकाल की नगरी उज्जैन के रहने वाले थे और अहमदाबाद विस्फोटों में शामिल थे। और तो और अक्टूबर 2009 में ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लश्कर ए तैयबा की धमकी का पत्र मिला। 30 अक्टूबर 2009 को इंदौर जिले के अलग अलग ठिकानों से सात सिमी आतंकवादी पकड़े गए और इनकी सूचना केंद्र सरकार को भी दे दी गई थी।

मध्य प्रदेश में भोपाल छोड़ कर कहीं मुस्लिम बहुत आबादी वाले नहीं है। हैरत की बात यह है कि सबसे ज्यादा मुस्लिम बहुल आबादी वाले इलाके रौशनपुरा से लगातार ग्यारह बार भाजपा के नेता बाबू लाल गौर जीत कर आए हैं। यही वह इलाका है जहां यूनियन कार्बाइड का हत्यारा कारखाना भी है। चंबल घाटी का आतंक खत्म हुआ लेकिन मध्य प्रदेश को अपना अभ्यारण्य बना लेने वाले आतंकवादियों से निपटना जरूरी है मगर उससे पहले यह सवाल भी करना जरूरी हैं कि साध्वी प्रज्ञा सिंह और सेना के कर्नल पुरोहित के खिलाफ आज तक तीन साल बीत जाने के बाद भी कोई अंतिम चार्ज शीट दाखिल नहीं की गई।