रियर एडमिरल जामवाल की मौत, हत्या या आत्महत्या?
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आलोक तोमर
डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 10 जुलाई- भारतीय नौसेना के नंबर दो के अधिकारी रियर एडमिरल एस एस जामवाल की मौत को जो लोग एक मामूली भटकी हुई गोली का नतीजा मान कर चल रहे हैं उनके लिए अपना विचार बदल देने का वक्त आ गया हैं। दक्षिणी नौसैनिक कमान के मुखिया और भारती पनडुब्बी तकनीक के सबसे काबिल विशेषज्ञो में से एक एडमिरल जामवाल इतनी लापरवाह नहीं थे कि एक मामूली गोली से मारे जाते।

कहा गया है कि जहां पर फायरिंग रेंज में निशानेबाजी चल रही थी वहां से गुजरते वक्त जामवाल को गोली लगी। मगर पोस्टमार्टम की रिपोर्ट कुछ और कहानी कहती है। गोली निशानेबाजी की राइफलों से नहीं, बल्कि नौ एमएम की बरेटा ब्रांड की पिस्तौल से लगी और जामवाल के दाएं कान के ठीक एक सेंटीमीटर ऊपर लगी और बाएं कान के तीन सेंटीमीटर ऊपर से निकली।

पुलिस ने अपनी अपराध वैज्ञानिक जांच में पाया है कि अगर गलती से जामवाल को गोली लगी होती तो गोली चेहरे पर लगती। जामवाल नौसेना के अगले अध्यक्ष होने वाले थे और आईएनएस द्रोणाचार्य के जहाज का निरीक्षण्ा करने गए थे। वही पर फायरिंग का अभ्यास चल रहा था। नौसेना के अधिकारियों ने कहा है कि जामवाल की अपनी पिस्तौल जाम हो गई थी और जब वे उसकी जांच कर रहे थे तो उससे गोली चल गई। तीस साल से पिस्तौलाें और बड़े हथियारों से खेल रहे और दो युद्व लड़ चुके रियर एडमिरल जामवाल इतने लापरवाह नहीं हो सकते कि भरी हुई पिस्तौल अपनी ओर कर के उसकी जांच करने लगे। और अगर वे जांच कर ही रहे थे तो क्या उन्होंने कान के पास पिस्तौल रख कर ट्रिगर दबाया था ताकि अगर पिस्तौल ठीक हो तो वे खुद अपना भेजा उड़ा बैठे?

जो संकेत और सबूत अब तक सामने आए हैं उनसे जाहिर है कि भारतीय नौसेना के दूसरे नंबर के सबसे वरिष्ठ अधिकारी ने या तो किसी बहुत बड़े तनाव में आत्महत्या की है या फिर उनकी हत्या की गई है। गोली इतने पास से लगी थी कि खाल तक जल गई थी। अगर यह दुर्घटना होती तो गोली लगने का कोण भी अलग होता और वह नीचे से ऊपर आई होती। दो चश्मदीद गवाहों ने तो पुलिस को साफ बताया है कि जामवाल अपनी पिस्तौल को छू भी नहीं रहे थे मगर पुलिस का कहना है कि वे अपनी जाम हो गई पिस्तौल की जांच कर रहे थे।

जम्मू तवी के रहने वाले जामवाल के पिता भी बड़े सैनिक अधिकारी हैं और वे नियमित रूप से अपने बेटे के संपर्क में थे। रोज उनसे बात होती थी। पिता मां के निधन के बाद अकेले रह गए थे इसलिए बेटे को उनकी ज्यादा चिंता थी। पिता का कहना है कि आखिरी बार मौत के कुछ ही समय पहले उनकी बात बेटे से हुई थी और हमेशा की तरह उसने हालचाल पूछे थे। मगर जो आदमी नौसेना का अगला अध्यक्ष बनने वाला हो और नौसेना लाखों करोड़ के रक्षा सौदों की तैयारी कर रही हो, उसकी इस तरह अचानक और किसी के गले नहीं उतरने वाले कारणों से होने वाली मौत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

जामवाल रूस से आयात होने वाले कबाड़ा विमान वाहक पोत गोर्शकोव की खरीद और उसके बदले दी जा रही कीमत पर कई बार सवाल उठा चुके थे इसके अलावा भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी अरिहंत की क्षमताओं पर भी उन्होंने सवाल उठाए थे और वे काफी हद तक सही निकले थे। अरिहंत को इसीलिए नौसेना में उतरने के बाद भी सार्वजनिक रूप से उसके फोटो जारी करने में एक वर्ष से ज्यादा लग गया। उम्मीद है कि भारतीय नौसेना के इतने बड़े अधिकारी की इतनी रहस्यमत मौत के मामले को यों नहीं छुपा दिया जाएगा।

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