हाफिज सईद भारत की शर्म क्यों हैं?
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आलोक तोमर
भारत को हाफिज सईद चाहिए। पाकिस्तान के लिए हाफिज सईद बहुत कीमती है। इसलिए नहीं कि वह पाकिस्तान का बहुत बड़ा वतन फरस्त या पाकिस्तान के लिए जरूरी है लेकिन सच यह है कि हाफिज मोहम्मद सईद के पास पाकिस्तान के इतने ज्यादा राज है कि अगर भारत सरकार उसे ले आई और कहीं उल्टा टांग कर तोते की तरह बोलवाना शुरू कर दिया तो पाकिस्तान के बहुत सारे नंगे सच सामने आ जाएंगे।

आखिर डेविड कोलमन हेडली ने कह ही दिया है कि आईएसआई को मुंबई में हुए 26/11 के हादसे की न सिर्फ आदि से अंत तक जानकारी थी बल्कि इस शर्मनाक हादसे का सूत्रधार भी यह सरकारी पाकिस्तानी खूनी संगठन आईएसआई ही है। हाफिज सईद लश्कर ए तैयबा का नेता था मगर भारत के दबाव में लश्कर के खिलाफ जब अभियान शुरू किया गया और उसे आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया गया तो उसने पूरे संगठन का नाम बदल कर उसे गैर सरकारी और कल्याण्ाकारी संगठन के तौर पर जमात उद दावा के नाम से रजिस्टर करवा लिया और उसका नेता बन बैठा। अब हाफिद सईद का कहना है कि लश्कर ए तैयबा से उसका कभी कोई वास्ता नहीं था। इस बात पर आप भरोसा करना चाहे तो कर सकते हैं।

हाफिज सईद पाकिस्तान के पंजाब के इलाके के सरगोदा का रहने वाला है और असल में उसका परिवार हिमाचल प्रदेश के शिमला का रहने वाला था। सईद अपने तूफानी भाषणो में बार बार कहता है कि उसने विभाजन के दौरान शिमला से लाहौर की यात्रा में अपने परिवार के 36 लोगों की जान गवाई है और उसे भारत से बदला लेना है। मगर पाकिस्तान के रहमान मलिक से ले कर युसूफ रजा गिलानी तक कहते हैं कि हाफिज सईद जो बोल रहा हेै वह उसकी व्यक्तिगत आजादी है और पाकिस्तान भी भारत की तरह लोकतांत्रिक देश हैं जहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा सम्मान किया जाता है। इस दावे पर आप सिर्फ हंस सकते हैं और वह एक हारी हुई हंसी होगी क्योंकि इसी पाकिस्तान में नमाज से ले कर बहुत सारे सवालों पर खुल कर बोलने वालों को संगीन सजाएं दी गई है।

हाफिज सईद का उदय जिया उल हक के जमाने में शुरू हो गया था। जिया उल हक जब जनरल नहीं बने थे तभी से सईद की आग उगलने वाली बोलने की शैली से प्रभावित थे। जब पाकिस्तान की कमान जिया के हाथ में आई तो पाकिस्तान सरकार की इस्लामी सिद्वांत परिषद के एक महत्वपूर्ण सदस्य के तौर पर हाफिज सईद को राज्य मंत्री का दर्जा दे कर तैनात किया गया। इतना ही नहीं, पाक अधिकृत कश्मीर में जो प्रशिक्षण शिविर लगातार आईएसआई चला रही थी वहां भी भावी हत्यारों और जेहादियो के बीच जोश भरने का काम हाफिज सईद को दिया गया।

यह शर्मनाक काम एक तरह से छुपा रहे और इसे कोई सम्मानजनक परिभाषा दी जाए इसके लिए हाफिज सईद को लाहौर के इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नियुक्त कर दिया गया। यह बात अलग है कि अगर हाफिज सईद की टॉर्च भी खराब हो जाए तो भी वह शायद बैटरियां तक नहीं डाल सके। यह उसका इंजीनियरिंग का ज्ञान है। लेकिन एक विदेशी चैनल को जब उसने इंटरव्यू दिया तो कहा कि वह तो इंजीनियरिंग पढ़ रहे बच्चों को इस्लाम सिखाता था।

आईएसआई ने हाफिज सईद की अपार विस्फोटक प्रतिभा को पहचान कर उसे सउदी अरब में भी भेजा और आईएसआई को उम्मीद नहीं थी इससे ज्याद प्रतिभा हाफिज सईद ने दिखा दी। अरब शेखों से मिल कर अफगानिस्तान में जेहाद के लिए उसने करोड़ों डॉलर इन शेखों से जमा किए और इस पैसे का ज्यादातर हिस्सा आईएसआई के खजाने में पहुंचा।

एक हुआ करते थे प्रोफेसर जफर इकबाल जो काफी पढ़े लिखे थे मगर उन्हें आतंक की भाषा ज्यादा समझ में आती थी। उन्हें हाफिज सईद में काफी दम नजर आया और दोनों मिल कर अफगानिस्तान में मुजाहिदीन को हथियार, मदद और पैसा पहुंचाने चले गए। अगर पाकिस्तान यह दावा करता है कि हाफिज सईद का भारत से कोई लेना देना नहीं हैं तो उसे यह याद दिलाया जाना चाहिए कि हमारी सेना की गुप्तचर शाखाओं के पास मौजूद जानकारी में वह 1990 के दशक में कश्मीर भी आया और पंजाब के कई इलाको में भी गया।

दरअसल 1987 में हाफिज सईद ने अब्दुल आजम नामक एक तस्कर के साथ मिल कर मरकज दावा बल इरशाद नाम का एक तथाकथित धार्मिक संगठन बनाया और जल्दी ही इसे हमलावर आतंकवादी संगठन जमाइत अहल ए हबीज का नाम दे दिया। इसी संगठन को बाद में आईएसआई ने लश्कर ए तैयबा का नाम दिया और सउदी अरब से जो पैसे कमा कर हाफिज सईद लौटा था उनका एक बड़ा हिस्सा लश्कर ए तैयबा को संगठित करने में लगा दिया। लश्कर ए तैयबा आज की तारीख में नाम बदल कर ही सही, भारत में सक्रिय एक सबसे बड़ा और भयानक समूह है। हाफिज सईद ने लश्कर ए तैयबा का जो संविधान बनाया था उसमें जम्मू कश्मीर के अलावा हैदराबाद और जूनागढ़ को तथाकथित तौर पर आजाद करवा कर पाकिस्तान में मिलाने का कारनामा शामिल था।

दो दो विश्वविद्यालयों से एम ए की डिग्री पाए हुए हाफिज सईद को पाकिस्तान ने बहुत दबाव में पहली बार 21 दिसंबर 2001 को भारत की लोकसभा पर उसी महीने हमले के सिलसिले में भारत द्वारा दिए गए सबूतों के आधार पर पकड़ा था। कुछ दिन वह गिरफ्तार रहा, फिर छोड़ दिया गया और फिर नजरबंदी के नाम पर एक शानदार होटल में रख दिया गया। इसके बाद उस पर मुकदमा तो कभी चलाया ही नहीं गया।

ग्यारह जुलाई 2006 को मुंबई रेलगाड़ियो में जो बम धमाके हुए उनके बाद सबूतों के आधार पर जमात उद दावा के नेता के तौर पर 9 अगस्त 2006 को हाफिज सईद को घर में बंद रखा गया मगर 28 अगस्त को लाहौर उच्च न्यायालय ने सबूतों के अभाव में उसको बरी कर दी। उसी दिन एक भड़काऊ भाषण देने के इल्जाम में और वह भी इसलिए कि यह भाषण अमेरिकी टेलीविजन ने रिकॉर्ड कर लिया था, हाफिज सईद को सिर्फ नजरबंद किया गया और लाहौर उच्च न्यायालय ने कुछ दिन बाद फिर उसे छोड़ दिया। मुंबई के 26/11 वाले हमलो में भी आईएसआई के लिए हाफिज सईद ही मास्टर माइंड था और हाल यह था कि हेडली की बीबी ने सईद से शिकायत की थी कि ये बंबई में ज्यादा रहते हैं और मेरा ख्याल नहीं रखते। हेडली ने भारत की टीम को बताया है कि उसने बीबी के बहाने कुछ दिन की छुट्टी मांगी थी मगर यह छुट्टी उसे नहीं दी गई। पाकिस्तान को हाफिज सईद के खिलाफ सबूत चाहिए या वह तमाचा चाहिए जिससे वह अब तक वंचित है।