पाकिस्तान के धारावाहिक झूठों का क्या जवाब है?
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आलोक तोमर

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भारत सरकार और भारत के विदेश मंत्री एस एम कृष्णा के बारे में चाहे जितनी बयानबाजी कर ले मगर कुछ ही दिन में एक दूसरे के सामने फिर पड़ना है और इतने सारे झूठ बोलने के बाद कृष्णा से कुरैशी कैसे आंखे मिलाएंगे यह देखने लायक करिश्मा होगा।

शाह महमूद कुरैशी ने धारावाहिक झूठ बोले हैं। एस एम कृष्णा भारत पहुंच गए इसके बावजूद कुरैशी झूठ बोलने का अपना सिलसिला जारी रखे रहे। कुरैशी का पहला झूठ यह था कि पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तान की सेना की यह नीति कतई नहीं है कि वह भारत की सीमा में घुसपैठ करे। यह झूठ उन्होंने कृष्णा के सामने बोला था और तब बोला था जब कृष्णा तीन दिन पहले ही एक घुसपैठ और पाक अधिकृत कश्मीर से गोलाबारी के सबूत दे चुके थे।

इसके बाद कुरैशी ने दूसरा झूठ यह बोला कि आईएसआई और पाकिस्तानी सेना की भारत में कोई गतिविधि नहीं चल रही है। यह एक ऐसा झूठ है जिस पर खुद कुरैशी को भी ऐतबार नही होगा। आईएसआई और उसकी प्रायोजित संस्था लश्कर ए तैयबा भारत में क्या क्या बवाल मचा रही है यह अब शिकागों में हेडली भी बता चुका है और हेडली के बयानों के पूरे टेप ले कर कृष्णा गए थे।

कुरैशी ने बहुत छाती ठोक कर कहा कि पाकिस्तान लोकतांत्रिक देश है और यहां की न्यायपालिका आजाद है जिसे हम किसी समय सीमा में नहीं बांध सकते। यह एक और झूठ था। पाकिस्तान की न्यायपालिका कितनी आजाद है यह इसी बात से जाहिर है कि पाकिस्तान के एक भूतपूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर चढ़ा दिया जाता है, उनकी दो बार प्रधानमंत्री रह चुकी बेनजीर को गोली से उड़ाया जाता है और जांच संयुक्त राष्ट्र संघ को करनी पड़ती है। तब पाकिस्तान की आत्म निर्भर और आजाद न्यायपालिका कहां चली जाती है और उसके निष्कर्ष कहां होते हैं?

कुरैशी ने पाकिस्तान की ओर से एक और झूठ यह बोला कि कश्मीर का मुद्दा हम किसी भी बातचीत में छोड़ नहीं सकते। जबकि यह बातचीत जब तय हुई थी तभी कह दिया गया था कि मुंबई के हादसाें और हाफिज सईद और लश्कर ए तैयबा जैसे लोगों के प्रत्यर्पण की बात की जाएगी और पाकिस्तान सरकार और किसी मुद्दे को बीच में नहीं लाएगी।

कुरैशी का एक बड़ा और आखिरी झूठ यह है कि भारत पूरी तैयारी से पाकिस्तान में बातचीत करने नहीं गया था। फिर क्या भारत वहां भाड़ झोकने गया था? कुरैशी पाकिस्तान की सेना और आईएसआई के गुलाम है और पाकिस्तान की सेना और आईएसआई अमेरिका की गुलाम है। इसलिए बजाय कुरैशियों के झूठ सुनने की एक बार भारत वॉशिंगटन से ही हिसाब किताब बराबर क्यों नहीं कर लेता?


महमूद कुरैशी ने लगता है कि कसम ही खा ली थी कि वार्तालाप को सिर्फ पाखंड बनाए रखना हैं। भारत के विदेश मंत्री कृष्णा विदेश में ही थे और अलग अलग राजनयिकों से मुलाकात कर रहे थे, मगर कुरैशी के मुंह मे जो शब्दो की जो बवासीर हुई थी वह जारी थी।

उन्होंने बाकायादा भारतीय विदेश मंत्री और भारत सरकार का मखौल उड़ाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपने राजनयिक भेज कर भारत  को प्रशिक्षण देना पड़ेगा। उन्होंने कहा और सही ही कहा कि बातचीत का प्रस्ताव भारत की ओर से  आया था वरना पाकिस्तान को दुश्मनों से निपटने के सारे तरीके आते हैं। कुरैशी भूल गए थे कि कुछ ही समय पहले  वे भारत और पाकिस्तान को हम कदम, हम दम और हम साया करार दे रहे थे। बातचीत के पहले दौर में कुरैशी ने भारत और पाकिस्तान के वित्त और वाणिज्य सचिवों के बीच आपसी रिश्ते और व्यापार सुधारने की बात कही थी।

मगर यह पाखंड का पहला हिस्सा था। ऐसी बाते शुरूआत में कही जाती है ताकि बातचीत चलती रहे। इसके बाद जब मुद्दे की बात आई तो कुरैशी  अनवरत् निषेध की मुद्रा में आ गए। उन्होंने लगातार कहा कि पाकिस्तान या कोई भी पाकिस्तानी संस्था भारत में आतंकवाद फैलाने में दिलचस्पी नहीं रखती। उन्हें शायद याद नहीं कि भारत भर की जेलों में पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों और आईएसआई के ढेरो जासूस बंद हैं और कई अपना गुनाह मंजूर कर चुके हैं।

दोष शायद हमारी राजनयिक प्राथमिकताओं का भी हैं। हमे सदा से पता था और सदा पता रहेगा कि पाकिस्तान का अस्तित्व बचा ही तब तक है जब तक वह भारत के खिलाफ मोर्चा खोले रखता हैं। अमेरिका को भी तमाम शांति सूचक वाक्यों के बावजूद पाकिस्तान के भारत के साथ किए जा रहे रवैए पर कोई ऐतराज नहीं हैं।

आप याद कीजिए कि कुरैशी ने इतनी लंबी चौड़ी बकवास कर ली, भारत का सरेआम अपमान कर लिया मगर यह लिखे जाने तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और राष्टपति की ओर से खेद या सफाई का एक शब्द भी नहीं आया हैं। पाकिस्तानी राष्टपति जरदारी को तो छोड़िए जो टके के भाव भी नही गिने जाते मगर युसूफ रजा गिलानी तो आधुनिक और एक तरह से मेल मिलाप की भाषा बोलने वाले आदमी है मगर अपने विदेश मंत्री की बौखलाई हुई बकवास के बारे में उन्होंने एक भी शब्द नहीं कहा।

यह मानने को बाध्य होना पड़ता है कि पाकिस्तान भले ही अपने आपको लोकतांत्रिक देश कहने का आडंबर रचा ले मगर सच यह है कि पाकिस्तान की रीति नीति और गति दुर्गति वहां की सेना और आईएसआई  ही तय करती हैं। भारत तो आईएसआई की नीतियों का शिकार हो ही रहा है मगर उससे भी ज्यादा पाकिस्तान का लोकतंत्र हो रहा हैं।