आलोक तोमर
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले बिहार की सरकार पूरी कोशिश में लगी है कि अलीगढ़ विश्वविद्यालय का एक केंद्र बिहार के किशनगंज में स्थापित हो जाए। मंजूर बहुत पहले मिल चुकी है, पैसा बहुत पहले मंजूर हो चुका है, जमीन बहुत पहले तय की जा चुकी है लेकिन कपिल सिब्बल बिहार सरकार को यह लाभ नहीं देना चाहते।
नीतिश कुमार भी कम चालाक नहीं है। वे इस पूरे नए आयोजन का शिलान्यास से ले कर उद्धाटन तक खुद करना चाहते हैं ताकि मुस्लिम वोट बैंक का लाभ उन्हें मिल सके। इसी चक्कर में बिहार के सबसे पिछड़े और पूर्णिया जिले को काट कर बनाए गए किशनगंज जिले में जहां सत्तर प्रतिशत मुस्लिम रहते हैं, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की मंजूर सुधार शाखा स्थापित नहीं हो पाई।
किशनगंज में भारत के विदेश सचिव रहे सैय्यद शहाबुद्दीन और प्रसिद्व पत्रकार एम जे अकबर तक लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं मगर इन सबको बाहरी माना जाता है। असल में तो किशनगंज बिहार के भी सबसे पिछड़े हुए जिलों में से एक हैं जहां साक्षरता का प्रतिशत अब भी सिर्फ 32 प्रतिशत है। यह प्रतिशत पूरे देश में 65 और बिहार में 48 प्रतिशत है। अगर सिर्फ मुस्लिमों की बात की जाए तो किशनगंज के मुसलमानों में तो साक्षरता का प्रतिशत सिर्फ 24 है और यह किसी भी सभ्य, साक्षर और विकासशील देश के लिए शर्मनाक बात है।
किशनगंज में अगर अलीगढ़ विश्वविद्यालय का विस्तार केंद्र खुल जाता तो कुछ सुधार की उम्मीद की जा सकती थी। यह विस्तार केेंद्र कटिहार और किशनगंज में से एक जगह खोलना तय हुआ था। कटिहार में भी मुस्लिम आबादी 42 प्रतिशत है मगर आखिर में जब फरवरी 2009 में नीतिश कुमार को चुनाव करना था तो उन्होंने भारत में मुस्लिम मतदाताओं की एक मात्र तय सीट किशनगंज का ही चुनाव किया।
कपिल सिब्बल कोशिश में है कि जितना भी मिल सकता हो इसका लाभ कांग्रेस के लिए उठाने की कोशिश में है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय वैसे भी केंद्रीय विश्वविद्यालय है इसलिए यहां के केंद्र का उद्धाटन करने भारत की राष्ट्रपति और यूपीए के अध्यक्ष के तौर पर श्रीमती सोनिया गांधी भी आ सकती है। जब सोनिया गांधी रोहतांग में भाजपा शासन वाले प्रदेश में जा कर रक्षा मंत्रालय की पहल पर बन रही सुरंग का शिलान्यास कर सकती है तो उन्हें किशनगंज आने से कौन रोक सकता हैं?
नीतिश कुमार इसके लिए भी तैयार हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर मंच पर वे रहेंगे और इसका लाभ उन्हें मिलेगा ही। उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को वे शायद ही मंच पर ले जाएं। फरवरी 2009 में जब नीतिश कुमार ने किशनगंज में केंद्र खोलने का ऐलान किया था तो वहां पर बाकायदा जुलूस निकले थे। किशनगंज के कलेक्टर फरीक अहमद को फटाफट जमीन का इंतजाम करने के लिए कहा गया था। फरीक अहमद तैयार बैठे थे और उन्होने खंड विकास अधिकारी और क्षेत्रीय अधिकारी से मिल कर 246 एकड़ जमीन का इंतजाम कर के भेज दिया और 17 अगस्त 2009 को अधिसूचना भी जारी हो गई। नीतिश कुमार के हाथ में लॉटरी लग गई थी इसलिए उन्होंने 26 सितंबर 2009 को ऐलान किया कि राज्य सरकार इस केंद्र के लिए सौ एकड़ जमीन मुफ्त में देगी। उनके इस बयान की बाकी लोगों ने तो नींदा की ही, एनसीपी के नेता तारिक अनवर ने भी इसका मजाक उड़ाया। ऐसा नहीं कि तारिक अनवर को अपने मुसलमान होने पर कोई शर्म आती हो मगर वे कटिहार के रहने वाले है और किशनगंज को यह केंद्र मिलना उनकी राजनीति को खंडित कर रहा था।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रोफेसर अब्दुल हजीज ने नीतिश कुमार से मिल कर 4 फरवरी 2010 को ढाई सौ एकड़ जमीन की मांग की थी। यह जमीन तीस साल की कौड़ियों के दाम मिलने वाली लीज पर विश्वविद्यालय के नाम कर भी दी गई। लग रहा था कि अब कोई दिक्कत नहीं आएगी। मगर सरकार में शामिल भाजपा की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस केंद्र के खिलाफ पूरे प्रदेश में आंदोलन कर बैठी। उधर अभी हाल में 22 मई 2010 को अलीगढ़ से वही अब्दुल हजीज साहब किशनगंज पहुंचे तो उन्होंने जमीन इस आधार पर खारिज कर दी कि यह तीन हिस्सों में है और सुरक्षा के हिसाब से ठीक नहीं है। राजनीति शुरू हो गई थी।
अगले महीने यानी अगस्त तक बिहार में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो जाएगी और उसके बाद कुछ नहीं होने वाला। जुलाई के भी ज्यादा दिन नहीं बचे हैं और इसी दौरान अगर कोई फैसला नहीं हुआ तो जाहिर है कि किशनगंज में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का आना इतिहास बन जाएगा। 4 जुलाई को नीतिश कुमार विश्वास यात्रा के तहत किशनगंज पहुंचे थे और वहां उम्मीद की जा रही थी कि वे नई जमीन की शिनाख्त कर चुके होंगे मगर नीतिश कुमार घोषणा नहीं कर पाए। कपिल सिब्बल बहुत प्रसन्न होंगे, भाजपा के उनके साथी भी बहुत प्रसन्न होंगे और नीतिश कुमार ने अपने दो अधिकारियों को दिल्ली में एक तरह से तैनात कर दिया है जो केंद्र सरकार और खास तौर पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय से तालमेल कर के जल्दी से जल्दी इस विश्वविद्यालय के केंद्र की स्थापना की घोषणा और शिलान्यास का कर्मकांड कर सके।