निरक्षर जरदारी
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आलोक तोमर
आसिफ अली जरदारी से ज्यादा अनपढ़ इंसान कोई नहीं हो सकता। वे कहते हैं कि पाकिस्तान का इतिहास सिर्फ बासठ साल पुराना है। इस बात को समझा कर कहा जाए तो मतलब यह कि बासठ साल पहले, जहां आज लाहौर, कराची और पेशावर है वहां या तो अंतरिक्ष था या समुद्र। मोहन जोदाड़ो और हड़प्पा की लाखों साल पुरानी संस्कृति के अवशेष भी जरदारी को नजर नहीं आते। आएं भी कैसे? उन्होंने अपनी ज्यादातर जिंदगी अपनी पत्नी के शासन काल में दस प्रतिशत का कमीशन खा कर गुजारी है। आज भी लोग उन्हें प्यार से मिस्टर टेन परसेंट कहते है। बासठ साल पहले पाकिस्तान का इतिहास वहीं था जो भारत का है और भारत का इतिहास अनंतकाल पुराना है। पाकिस्तान इस तथ्य को अदृश्य कर देना चाहता है कि वह भारत का सहोदर है, भारत की काया से ही पाकिस्तान जैसे फर्जी देश का जन्म हुआ है जहां जब चाहे, जो चाहे संविधान बदल देता है। जरदारी को नहीं मालूम होगा कि पाकिस्तान की स्थापना के लिए नेहरू, गांधी और पटेल को ब्लैक मेल कर के जिन मोहम्मद अली जिन्ना ने पहल की थी और जिन्हें वहां कायदे आजम कहा जाता है और जिनकी तस्वीर जरदारी की सीट के पीछे भी टंगी हुई है, उन्होंने पाकिस्तान का पहला राष्ट्रगान लिखने के लिए एक भारतीय हिंदू जगन्नाथ आजाद को चुना था। दस साल तक जगन्नाथ आजाद का लिखा ए सर जमीने पाक ही पाकिस्तान का राष्ट्रगान रहा। इसके बाद अल्लामा इकबाल से राष्ट्रगान लिखवाने की पहल की गई और ये वही साहब है जिन्होंने लिखा था- सारे जहां से अच्छा, हिंदोस्ता हमारा। ये हिंदोस्ता लिखना ही उनका गुनाह बन गया। इसके बाद मशहूर शायर हाफिज जालंधरी ने अपनी एक रचना दी जो 1950 में राष्ट्रगान बनाने के लिए विचारार्थ मंजूर कर ली गई और बाद में यही पाकिस्तान का राष्ट्रगान बना। नाम से ही जाहिर है कि हाफिज जालंधरी का जन्म भारत के जालंधर में हुआ था। आसिफ अली जरदारी साहब भारत और पाकिस्तान के इतिहास को कहां तक नकारेंगे। हाफिज जालंधरी उर्दू, पंजाबी और फारसी में लिखते थे और एक शेर तो शायद उन्होंने बहुत पहले ही आसिफ अली जरदारी जैसे ठस दिगाम के लोगों के लिए लिख दिया था- ''हम में ही न थी कोई बात, याद न तुमको आ सके/ तुमने हमें भुला दिया,  हम न तुम्हे भुला सके।'' यह बात आज भारत द्वारा आसिफ अली जरदारी को बताने की जरूरत है। भारत और पाकिस्तान के इसी साझा इतिहास को भुलाने की वजह से आज पाकिस्तान की दुर्गति हो रही है। पाकिस्तान शंकर जी नहीं हैं मगर वह बार बार भस्मासुर रचता है और बार बार भस्म हो जाता है। फिलहाल तालिबान पाकिस्तान को भस्म करने में लगे हुए हैं और अमेरिका रिमोट कंट्रोल से आग भी लगा रहा है और फायर ब्रिगेड का काम भी कर रहा है। अमेरिका का यह पुराना धंधा है और पाकिस्तान में यह धंधा चल निकला है क्योंकि पाकिस्तान बेचारा खुद मानता है कि वह तो एक नवजात बालक है। देश तो खैर वह है ही नहीं। ज्यादा से ज्यादा वतन हैं।

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