हारे तो भिड़ गए धोनी-सहवाग       आए तो कर्ज माफ़ करेंगे राजनाथ       अजित पर भारी, भारी उद्योग मंत्री       अब आचार संहिता पर बावेला       हार मानने वाले नहीं स्वामी       मुंडा के सुर भी विरोध में       अफसर हैं या भाजपा कार्यकर्ता
स्वर्गीय आलोक तोमर हिंदी पत्रकारिता में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं 18 साल पहले उन्होंने फीचर एजेंसी के रूप में एक दीप आलोकित किया था जो अब एक वेबसाईट रूपी मशाल के तौर पर आपके सामने है.सवाल था कि वे सशरीर अब हमारे बीच नहीं हैं तो क्या इस मशाल को बुझा दिया जाए? ऐसा संभव नहीं था और अब यह मशाल उनकी धर्मपत्नी सुप्रिया रॉय ने थाम ली है. साथ में सैकड़ों मशालें उन हाथों में हैं जो उनके करीबी रहे हैं या आलोक तोमर स्कूल आफ जर्नालिज्म से शिक्षित , दीक्षित और प्रेरित हो कर चल पड़े हैं धारा के विरुद्ध और यह काफिला चलता रहेगा यह वादा ....उसी तेवर के साथ जिसके लिए आलोकजी जाने जाते थे.


" क्या हुआ गर कुछ बलाएं साथ हैं
आपकी शुभकामनाएं साथ हैं
हर अँधेरे को फतह कर लेंगे हम
आलोक की स्मृतियाँ अब साथ हैं. "

 
 
About us | Contact us | Privacy Policy | Disclaimer | Advertisement with Us .
 
Copyright @ 2010, Datelineindia.com Powered by eMag Technologies Pvt.Ltd .