हाफिज के दामाद ने रची थी पंपोर हमले की साजिश, आतंकियाें को ढेर करने के श्रेय को लेकर आर्मी-CRPF में विवाद

28 जून

नई दिल्ली। पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के सरगना हाफिज सईद के दामाद खालिद वलीद ने जम्मू-कश्मीर के पंपोर में 25 जून को सीआरपीएफ काफिले पर हमले की साजिश रची थी। वलीद ने अपने दो साथियों हंजला अदनान और साजिद जाट को दो आतंकियों का हैंडलर बनाया था। दक्षिण कश्मीर का लश्कर कमाडंर अबु दुजना ने उन आतंकियों को स्थानीय मदद पहुंचाई थी। वहीं इस मुठभेड़ में ढेर हुए आतंकियोंं को मारने के श्रेय को लेकर सीआपीएफ और आर्मी के बीच तनातनी हो गई है।

एक अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार, खुफिया एजेंसियों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि हमले में पाकिस्तान प्रत्यक्ष तौर पर शामिल है। शीर्ष सूत्रों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों पर हमले समेत भारत के खिलाफ विदेशों में चलाए जाने वाले लश्कर के अभियानों के लिए वलीद को हाफिज सईद ने प्रशिक्षित किया है।

श्रेय को लेकर बढ़ा विवाद

सीरआरपीएफ और आर्मी के बीच आतंकवादियों को मारने को लेकर तनातनी देखी गई। इसमें इस बात को लेकर विवाद होता दिखा कि पंपोर में उस रोज़ आतंकवादियों को किसने मारा? सीआरपीएफ ने या फिर आर्मी के जवानों ने? पूरा मामला क्रेडिट लेने के इर्द गिर्द सिमटा हुआ लग रहा है।

आर्मी का कहना है कि उसने दो आतंकियों को मार गिराया, जबकि सीआरपीएफ ने इस बात का विरोध किया और कहा कि 'श्रेय लेने के लिए किया गया दावा गलत' है। सीआरपीएफ कह रही है कि आर्मी के जवान मौके पर तब पहुंचे जब मुठभेड़ खत्म हो चुकी थी। सीआरपीएफ के मुताबिक, जवानों ने घटनास्थल पर पहुंचने के बाद मारे गए आतंकियों के साथ सेल्फी लेनी शुरू कर दी।

इससे तिलमिलाए सीआरपीएफ कर्मी और अधिकारी कथित तौर पर मामला आर्मी के टॉप पदाधिकारियों तक ले गए। इसके बाद सेना की उत्तरी कमांड के ऑफिशल ट्विटर अकाउंट से रिवाइज्ड मेसेज पोस्ट किया गया जिसमें कहा गया कि- पंपोर ऑपरेशन पर अपडेट. घायल सीआरपीएफ कर्मियों को हॉस्पिटल ले जाया गया। सुरक्षा बलों के संयुक्त अभियान में दो आंतकवादी मारे गए।

इसके बाद और ज्यादा खुन्नस खाए हुए सीआरपीएफ अधिकारियों ने आर्मी और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया कि पंपोर में किसी प्रकार का कोई संयुक्त अभियान था ही नहीं। उन्होंने कहा कि आर्मी के जवान मुठभेड़ स्थल पर आए जब एनकाउंटर खत्म हो चुका था। उन लोगों ने आतंकवादियों के शवों के साथ सेल्फी लीं और आतंकियों के हथियार लेकर वापस चले गए।

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