उषा चांदना
सोहराबुद्दीन और कौसरबी की फर्जी मुठभेड़ अब मोदी के गले की ऐसी हव्ी बन चुकी है जो भाजपा को ना निगलते बन रही है और न उगलते। क्योंकि इसी फर्जी मुठभेड़ को मोदी ने आतंकवाद करार देकर मौत के सौदागर का नाम कमाया था और उसी नाम की बदनाम के भरोसे 2007 का विधानसभा का चुनाव लड़ा था। लेकिन कितने ताज्जुब की बात है कि बाद मे गुजरात सरकार ने ही सुप्रीम कोर्ट मे इसे फर्जी मुठभेड़ करार दिया। अमित शाह की गिरफ्तारी से सवाल इस बात का भी उठ रहा है कि मोदी के राज्य में सही मायने मे आतंकवाद की परिभाषा क्या है?
भाजपा कह रही है कि उसने बड़े मकसद के लिए अमित शाह का मुद्दा छोड़ दिया है। अपने बड़े मकसद के लिए भले ही शीर्ष स्तर पर बैठे नेताओं ने गुजरात के भूतपूर्व गृहमंत्री अमित शाह का मुद्दा छोड़ दिया हो लेकिन सीबीआई के शिकंजे में फंसे अमित शाह की पूछताछ से सच्चाई की परते जिस तरह से एक एक कर उभरकर सामने आ रही है उससे गुजरात राज्य के सामने एक सवाल यह आकर खड़ा हो गया है कि क्या सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर के खूनी छीटे मोदीत्व पर भी पड़ेंगे? पूछताछ के दौरान कहीं अमित शाह उस कहावत को चरितार्थ तो नही करेगे कि सनम हम तो डूबेगे लेकिन तुम्हे भी ले डूबेंगे? देश मे यह ऐसा पहला ऐतिहासिक मामला है जब किसी राज्य के गृहमंत्री पर हत्या, हफ्ता उगाहने जैसे संगीन आरोप लगाए गए है और उस मंत्री पर जिसके गॉडफादर खुद मोदी है। अमित शाह की गिरफ्तारी से क्या मोदी की उल्टी गिनती शुरू हो सकती है? क्या इस मामले से राज्य की राजनीति के समीकरण बदलेगे?
विधि का विधान देखिए कि जो पुलिस महकमा जिस गृहमंत्री को सलाम करते नही थकती थी उसी महकमे को उसे सलाखो के पीछे पहुंचाना पड़ा। 2002 मे प्रदेश में गोरधन झड़पिया के त्यागपत्र देने के बाद उन्हे यह विभाग सौंपा गया था। 2007 में अहमदाबाद के सरखेज विधानसभा से वे चुनाव जीते थे और गृहमंत्री का स्वतंत्र कार्यभार संभाला था। पूरे कार्यकाल के दौरान अमित शाह प्रदेश के गृहमंत्री होने की बजाय नरेन्द्र मोदी के सबसे विश्वस्त मंत्री के बतौर काम करते रहे। भाजपा मे रहे बागी नेता अब यह भी कहने लगे है कि अमित शाह ने जितने काम किए वह अपने लिए कम मोदी के लिए ही ज्यादा किए। वह चाहे सहकारी बैक हो या क्रिकेट का मैदान। गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर मोदी को और खुद को उपाध्यक्ष पद पर आसीन अमित शाह पर डुबाए गए माधोपुरा सहकारी बैक मे उन पर वैसे भी 2।5 करोड की रिश्वत लेने का आरोप है।
राज्य में अमित शाह का प्रभुत्व कितना था इसका अंदाज इसी से लग सकता है कि जब भी कैबिनेट की मीटिंग मे किसी विभाग को लेकर महत्वपूर्ण कमेटी बनाई जाती थी तो केबिनेट मे चार महत्वपूर्ण मंत्री होने के बावजूद भी राज्यमंत्री होते हुए भी अमित शाह 100 कमेटियो मे से 90 कमेटी मे शामिल होते थे। अमित शाह जिस कैबिनेट मीटिंग को सम्बोधित करते थे सब जानते थे कि यह गृहमंत्री अमित शाह नही मोदी बोल रहे है। लेकिन सीबीआई के फँदे में फंसने के बाद अब पुराने भाजपाई रहे शामिल सुनील ओझा का कहते है कि भाजपा अब भारतीय जनता पार्टी नहीं नही क्रिमिनल पार्टी हो गई है। वे कहते है कि भाजपा अब कैडर बेस्ड पार्टी नही रही। सभी महत्वपूर्ण फैसले गान्धीनगर मे होते है। गुजरात मे संघ के जितने महत्वपूर्ण शाखा किसान संघ थी उसको मोदी ने तोड दिया। गुजरात मे विहिप और बजरंग दल को निष्किय कर दिया लेकिन इस मामले मे मोदी की उल्टी गिनती जरुर शुरू होगी।
सच्चाई की परतो मे मोदी का एक ऐसा सच भी सामने आया है जो मोदी को भारी पड सकता है वह है संजय जोशी सीडी कांड। सीबीआई की जांच के दोरान पुलिस विभाग के पीआई बालमुकुन्द चोबे ने जांच मे बताया है कि संजय जोशी की सीडी एटीएस ने ही बनाई थी।सवाल इस बात का है कि क्या इन सब मुद्दो को लेकर भाजपा के खिलाफ बगावत होगी? कांग्रेस के वरिष्ट् नेता अर्जुन मोडवडिया का कहना है कि यह कहना असम्भव है क्योकि गुजरात मे मोदी का कोई दूसरा विकल्प नही है। लेकिन गुजरात मे साइड ट्रेक किए गए नेता कहते है कि पार्टी अगर झारखंड जैसी भूल करती है तो पार्टी का वही ह्श्र होगा। लेकिन सवाल इस बात का भी उठ खडा हुआ है कि सोहराबुद्दीन मामले मे सजा भोग रहे जब आईपीएस अधिकारियो को जमानत नही मिली तो अमित शाह को कैसे मिलेगी भले ही राम जेठ्मलानी जितनी कोशिश कर ले। मोदी को मालूम था कि सोहराबुद्दीन का केस उनके गले की हव्ी बना हुआ है इसीलिए उन्होने ही रामजेठ्मलानी को राज्यसभा का सदस्य बनाया। अब देखना यह है कि न्यायिक प्रक्रिया के चलते क्या आने वाले दिनो मे मोदी की उल्टी गिनती शुरु होती है या मोदी बेदाग साबित होते है?