मयंक सक्सेना
डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 12 सितंबर- हंसराज भारद्वाज ने झूठ बोला था और अब वीरप्पा मोइली झूठ बोल रहे हैं। भारद्वाज पहले कानून मंत्री थे और मोइली अब हैं इसलिए यह सरकार का कानूनी झूठ है। मामला मुंबई की किशोरी इशरत जहां और उसके तीन साथियों को फर्जी मुठभेड़ में अहमदाबाद के बाहर 15 जून 2004 को मार डालने का था। इस मामले में अहदाबाद की एक अदालत ने गुजरात पुलिस को दोषी ठहराया था और गुजरात सरकार ने इस मजिस्ट्रेट के खिलाफ ही विधि विभाग से जांच शुरू करवा दी।मगर झगड़ा उस शपथ पत्र का है जो गुजरात सरकार के दावे के अनुसार 6 अगस्त 2009 को भारत के कानून मंत्रालय ने तैयार किया था और गृह मंत्रालय ने गुजरात उच्च न्यायालय में पेश किया था। इशरत जहां की मां और उनके साथियों के परिवारों ने इस मामले की सीबीआई से जांच करवाने की मांग की थी मगर सर्वोच्च न्यायालय ने शपथ पत्र की जांच सीबीआई से करवाने से इंकार कर दिया। इस फर्जी मुठभेड़ के असली खलनायक गुजरात के मुठभेड़ विशेषज्ञ डीजी बंजारा हैं जिनके खिलाफ इसी मुठभेड़ के आरोप में बंद एक अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त से शिकायत की है कि वे जेल में उन्हें जान से मारने की धमकीयां दे रहे हैं। गृह मंत्रालय कह रहा है कि शपथ पत्र कही गुम हो गया है। डेटलाइन इंडिया के पास शपथ पत्र मौजूद है। इस शपथ पत्र में कहा गया है कि इशरत जहां और जावेद गुलाम मोहम्मद शेख के पूरे मामले पर विचार करने से पता चलता है कि जावेद मोहम्मद गुलाम मोहम्मद शेख के खिलाफ मुंबई में 1992 से 1998 के बीच कई आपराधिक मामले दर्ज हुए इसलिए उसको आपराधिक पृष्ठभूमि का माना जा सकता है। ऊपर की पक्तियाें पर गौर करिए और आगे की पक्तियां पढ़िए- याचिका करने वाले अर्थात मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिवार वाले उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों को गुमराह कर रहे हैं जबकि जावेद और इशरत दोनों ही लश्कर ए तैयबा के लिए काम करते थे। नरेंद्र मोदी कांग्रेस के लिए सबसे बड़े खलनायक हैं इसीलिए उनकी सरकार को बचाने वाला यह शपथ पत्र गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड से गायब करना ही एक मात्र रास्ता था। सच यह है कि जल्दबाजी में यह शपथ पत्र बनाने वाले अधिकारी को कानून मंत्रालय द्वारा हटा दिया गया है और हटाने के पहले उससे एक और शपथ पत्र लिखवाया गया है कि गुजरात वाले शपथ पत्र के बारे में वह किसी से कोई बात नहीं करेगा। डीजी बंजारा पर सिर्फ इशरत जहां को नकली मुठभेड़ में मारने का इल्जाम नहीं है। वह और उसका एक और आईपीएस साथी कुख्यात सोहराबुदीन मुठभेड़ कांड में साबरमती जेल में बंद हैं।