प्रधानमंत्री का जहाज ले कर विदेश जाएंगे प्रणब

श्रीपति त्रिवेदी
डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 10 सितंबर- प्रणब मुखर्जी ने एस एम कृष्णा और शशि थरूर को फाइव स्टार होटलों से निकलवा दिया है। संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल ने दस सांसदों की विदेश यात्रा प्रणब मुखर्जी के कहने पर रूकवाई और डेढ़ करोड़ रुपए बचाए। कहा गया कि सरकार सादगी और कम खर्चे पर जोर दे रही है इसलिए ऐसा किया गया।

मगर खुद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की महानता का जवाब नहीं। वे विदेश मंत्री की हैसियत से अक्तूबर के पहले सप्ताह में विश्व बैंक की बैठक में जाएंगे और इसी महीने वित्त मंत्रियों की बैठक में साइप्रस जाएंगे। वित्त मंत्री हैं इसलिए उनकी विदेश यात्रा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता लेकिन एक महत्वपूर्ण बात यह है कि वे प्रधानमंत्री का विशेष विमान ले कर दोनों जगह जा रहे हैं।

अगर श्री मुखर्जी अपने अधिकारियों के साथ सामान्य व्यावसायिक उड़ान से जाते तो, अधिक से अधिक दोनों यात्राओं में 75 लाख रुपए खर्च होते। मगर एक पूरा जहाज ले कर जाने का मतलब है कि सिर्फ एक यात्रा का खर्चा तीन करोड़ रुपए होगा। श्री मुखर्जी देश के खजाने के मालिक हैं और किसी भी खर्चे को मंजूदी दे सकते हैं।

लेकिन विशेष विमान ले जाने के पीछे राजनीति भी है। प्रणब मुखर्जी अब पूरी दुनिया में सिध्द कर देना चाहते हैं कि वे भले ही प्रधानमंत्री नहीं हो, मगर प्रधानमंत्री से कम भी नहीं है। प्रधानमंत्री के लिए सुरक्षित आधुनिकतम विमान में इंटरनेट से ले कर उपग्रह चैनलों के प्रसारण तक की व्यवस्था है और तीन बेडरूम है। इनके अलावा चालीस यात्रियों के बैठने के लिए सीटे भी है। एक कांफ्रेंस रूम हैं जहां वित्त मंत्री अपने अधिकारियों के साथ विचार विमर्श कर सकते हैं।

मगर यहां यह याद दिलाया जा सकता है कि इस्तांबूल की उड़ान सात घंटे की है और साइप्रस की साढ़े छह घंटे की। इस दौरान इस यात्रा का बड़ा हिस्सा देर रात को शुरू होगा और सुबह खत्म होगा। इस बीच अधिकारियों के साथ ऐसा कौन सा विमर्श होगा जो दिल्ली में नॉर्थ ब्लॉक में बैठ कर नहीं हो सकता। यह विमान चूंकि राष्ट्राध्यक्ष का विमान है इसलिए प्रणब मुखर्जी को इन देशों में राजकीय सम्मान मिलेगा। ठीक प्रधानमंत्री की तरह।

प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। सरकार मेें भी उनकी हैसियत काफी भारी है यह भी बार बार जाहिर होता रहता है। आधिकारिक रूप से वित्त मंत्रालय ने यह बताया है कि सिर्फ चार अधिकारी वित्त मंत्री के साथ जा रहे हैं और अगर यह सच है तो यात्रा के लिए पूरा विमान ले जाना शुद्व आपराधिक है।

छठे वेतन आयोग के बाद सचिव और संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों के लिए भी विमान में प्रथम श्रेणी की यात्रा की मंजूरी दे दी गई है लेकिन साथ ही परिपत्र भी जारी कर दिया गया है कि छह घंटे तक की उड़ान हो तो अधिकारी इकानॉमी क्लास में ही सफर करें। खुद प्रणब मुखर्जी ने इसी 7 सितंबर को सारे मंत्रालयों को परिपत्र भेज कर कहा है कि खर्चा कम करने के लिए कम से कम घरेलू और विदेश यात्राएं की जाए, विदेशों में सेमिनार न किए जाएं, पांच सितारा होटलों का इस्तेमाल कम से कम हो और यहां तक की नई कारें भी नहीं खरीदी जाए। श्री मुखर्जी ने शायद अपना परिपत्र खुद नहीं पढ़ा है।

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