सांतऊ शीतला मंदिर पर देर रात से लगा भक्तों का मेला

07  अक्टूबर

ग्वालियर। शहर से लगभग 20किमी की दूरी पर स्थित सांतऊ के शीतला माता मंदिर पर वैसे तो बारह महीनेही भक्तों की भीड रहती है। लेकिन आज देर रात से ही भक्तों का मेला लगा रहा । दिन भर वाहनों की दोनों ओर लम्बी लम्बी कतारें लग गई।लेकिन भक्तों की भीड देर रात से शुरू होकर दिन भर रही ।

चार सौ साल पुराना है मंदिर

पिछले करीब 400 सालों से भक्तों की मुराद पूरी करती चली आ रही हैं। मंदिर के आसपास हालांकि आज भी जंगल है, लेकिन जब यहां के घने जंगलों में शेर हुआ करते थे तब वह माता के दर्शन करने आते थे। इन शेरों ने कभी किसी ग्रामीण को नुकसान नहीं पहुंचाया, दर्शन कर चुपचाप जंगल में गायब हो जाते थे। मंदिर के पुजारी महंत नाथूराम का कहना है कि उनके पूर्वज महंत गजाधर मौजूदा मंदिर के पास ही बसे गांव सांतऊ में रहते थे। वे गोहद के पास स्थित खरौआ में एक प्राचीन देवी मंदिर में वह नियमित रूप से गाय के दूध से माता का अभिषेक करते थे।

 

महंत गजाधर की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी मां कन्या रूप में प्रकट हुईं और महंत से अपने साथ ले चलने को कहा। गजाधर ने माता से कहा कि उनके पास कोई साधन नहीं है वह उन्हें अपने साथ कैसे ले जाएं। तब माता ने कहा कि वह जब उनका ध्यान करेंगे वह प्रकट हो जाएंगी। गजाधर ने सांतऊ पहुंचकर माता का आवाहन किया तो देवी प्रकट हो गईं और गजाधर से मंदिर बनवाने के लिए कहा। गजाधर ने माता से कहा कि वह जहां विराज जाएंगी वहीं मंदिर बना दिया जाएगा। सांतऊं गांव से बाहर निकल कर जंगलों इस पहाड़ी पर विराज गईं। तब से महंत गजाधर के वंशज इस मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। महंत नाथूराम पांचवीं पीढ़ी के हैं।

 

 
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