'ग्वालियर-गोवा-बम्बई षडयंत्र केस' में कड़ी यातनाएं दी गईं क्रांतिकारियों को

स्वतंत्रता संग्राम और ग्वालियर-4

राहुल आदित्य राय

12  अगस्त

ग्वालियर। गोवा से हथियार खरीदकर लाने और सप्लाई करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए क्रांतिकारियों को जेल में कठोर यातनाएं दी गईं। बम्बई के प्रेसिडेंसियल मजिस्ट्रेट के समक्ष ‘ग्वालियर-गोवा-बम्बई षडयंत्र केस’ के नाम से आठ महीने तक चले मुकदमे में 1933 में सुनाए गए फैसले में तीन-तीन वर्ष की कैद और 500-500 रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई।

हथियार लाते हुए बम्बई में पकड़े गए स्टीफन जोजफ फर्नांडिस को पुलिस ने भयंकर यातनाएं दीं। सात दिनों तक सोने नहीं दिया और खड़ा रखा गया, जिसके कारण शरीर का खून पैरों में उतर गया और वे बेहोश होकर गिर पड़े। छह माह बाद 22 मार्च 1933 को सजा होने के बाद भी यातनाओं का सिलसिला चलता रहा, जिसके कारण उनकी हालत बिगड़ गई।

शिकायत करने पर भी अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। जेल में उन्हें टाट के कपड़े पहनने को दिए गए, जिसके कारण उन्हें कुष्ठ हो गया। कुष्ठ होने पर सरकार ने उन्हें छोड़ दिया। दर्दनाक हालत में चार वर्ष बाद गोवा में उनका निधन हो गया।

अन्य क्रांतिकारी श्री रामचन्द्र सर्वटे एवं श्री बालकृष्ण शर्मा को तीन-तीन वर्ष की तथा गिरधारी सिंह को ढाई वर्ष की सजा हुई। श्री सर्वटे काे बम्बई की यरवदा सेन्ट्रल जेल में तथा गिरधारी सिंह को आर्थर जेल में रखा गया। सभी को सजा के दौरान कठोर यातनाएं दी गईं।

गिरधारी सिंह को 1933 में अहमदाबाद सेन्ट्रल जेल भेज दिया गया। वहां उन्हें चक्की पीसने का काम सौंपा गया। उन्हें ज्वार पीसने को दी जाती थी। वह हट्टे-कट्टें पहलवान थे तो सोचते थे कि आसानी से पीस लेंगे, यह कौन सा भारी काम है, लेकिन जब पीसने को तैयार हुए तो हाथ पांव फूल गए। खड़े होकर दोनों हाथों से चक्की घुमाते किन्तु उससे कुछ भी नहीं होता था, ज्वार बिना पिसे रह जाती थी। जेल में उनके पास में ही एक बैरक में महान क्रांतिकारी भगवान दास माहौर एक मामले में कैद थे। उनसे गिरधारी सिंह आसानी से बात कर सकते थे। बाद में जब माहौर जी ने उन्हें तरकीब बताई तब कहीं जाकर ज्वार पीस पाए।

श्री बालकृष्ण शर्मा को ग्वालियर की टकसाल हवालात में रखा गया। उन्होंने वहां पर भूख हड़ताल कर दी। पुलिस ने यहां उनसे हथियारों के संबंध में खूब पूछताछ की, लेकिन कोई सुराग नहीं पा सकी। बाद में उन्हें महाराष्ट्र की बेलगांव जेल में भेज दिया गया। वहां भूख हड़ताल करने पर फटकों की सजा दी गई। लेकिन विरोध होने पर यह सजा कैंसिल कर दी गई। लेकिन छह माह की माफी काटकर सजा बढ़ा दी गई। ग्वालियर-गोवा-बम्बई षडयंत्र केस में सजा काट रहे सभी क्रांतिकारियों को 1935 में रिहा कर दिया गया।

इस केस में एक और आरोपी श्री बालमुकुन्द शर्मा, जो कि बालकृष्ण शर्मा के छोटे भाई थे, उन्हें बम्बई की वायखला जेल में रखा गया, लेकिन उन पर आरोप सिद्ध नहीं हुआ। उन्हें 22 मार्च 1933 को रिहा कर दिया गया।

 

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किस्त #1. भारत छोड़ो आंदोलन में कूदे ग्वालियर के युवा

किस्त #2. नेताओं की तस्वीर रखने पर गिरफ्तारी

किस्त #3. गोवा से हथियार लाते थे क्रांतिकारी

किस्त #5. दो युवा क्रांतिकारी भाइयों ने छकाया पुलिस को

किस्त #6. सिर कटाना मंजूर टोपी उतारना नहीं

किस्त #7. चन्द्रशेखर आजाद और भगत सिंह आते थे ग्वालियर, काकोरी गए थे यहां से बम

 

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