चन्द्रशेखर आजाद और भगत सिंह आते थे ग्वालियर, काकोरी गए थे यहां से बम

स्वतंत्रता संग्राम और ग्वालियर- अंतिम

राहुल आदित्य राय

15  अगस्त

ग्वालियर। ग्वालियर क्रांतिकारी गतिविधियों का महत्वपूर्ण केन्द्र था। देशभर से यहां क्रांतिकारियों का आना और रुकना होता था। यहां बनने वाले हथियार और बम विभिन्न क्षेत्रों में भेजे जाते थे। प्रसिद्ध ‘काकोरी ट्रेन डकैती’ में प्रयुक्त होने के लिए बम ग्वालियर से गए थे।

महान क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, भगवानदास माहौर, भाई परमानंद, अरुणा आसफ अली, गेंदालाल दीक्षित, जयप्रकाश नारायण, श्री केशकर, मोहनलाल गौतम का ग्वालियर आना जाना था। नेहरू जी भी यहां आए थे।

चन्द्रशेखर आजाद जनवरी से जुलाई 1925 तक कई बार गोपनीय रूप से भेष बदलकर यहां रुके थे। वे जनकगंज में मेहंदीवाली गली में कदम साहब के बाड़े में रहते थे। भगत सिंह भी अल्पकाल के लिए यहां ठहरे थे।

जनकगंज में ही दादाजी अग्रवाल के मकान में गुप्त रूप से बम बनाए जाते थे। बम बनाने का सामान मिठाई के डिब्बों और दूध की बाल्टियों में लाया जाता था और मिठाई के डिब्बों में रखकर अन्य स्थानों पर बम भेजे जाते थे। यह काम बड़ा जोखिमभरा था। पुलिस बहुत मुस्तैद रहती थी, लेकिन कोई परवाह किए बिना श्री दिवेकर, श्री बब्बन ऋषि, श्री वैश्म्पायन, श्री रामचन्द्र करकरे, श्री देसाई फोटोग्राफर, श्री गजानन सदाशिव इस काम को अंजाम देते थे।

श्री भगवानदास माहौर, सदाशिवराव मलकापुरकर झांसी से आकर इस काम में सहयोग करते थे।

काकोरी में हुए प्रसिद्ध ट्रेन डकैती काण्ड में उपयोग करने के लिए ग्वालियर से ही बम गए थे। काकोरी में ट्रेन डकैती होने के बाद क्रांतिकारियों की धरपकड़ की गई। यहां भी पुलिस ने श्री देसाई फोटोग्राफर और गजानन सदाशिव पोतदार को गिरफ्तार कर लिया, जबकि श्री रामचन्द्र करकरे फरार हो गए।

 

स्वतंत्रता संग्राम और ग्वालियर की अन्य किस्तें यहाँ पढ़ें -

किस्त #1. भारत छोड़ो आंदोलन में कूदे ग्वालियर के युवा

किस्त #2. नेताओं की तस्वीर रखने पर गिरफ्तारी

किस्त #3. गोवा से हथियार लाते थे क्रांतिकारी

किस्त #4. 'ग्वालियर-गोवा-बम्बई षडयंत्र केस' में कड़ी यातनाएं दी गईं क्रांतिकारियों को

किस्त #5. दो युवा क्रांतिकारी भाइयों ने छकाया पुलिस को

किस्त #6. सिर कटाना मंजूर टोपी उतारना नहीं

 

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