लालजी बनेंगे मध्य प्रदेश के लाट साहब

25  सितम्बर

‍@ अनिल जैन

 

लालजी बनेंगे मध्य प्रदेश के लाट साहब

उत्तर प्रदेश के बुजुर्ग भाजपा नेता लालजी टंडन का अच्छे दिनों का इंतजार खत्म होने वाला है। संकेत हैं कि वह मध्य प्रदेश के राज्यपाल के तौर पर भोपाल स्थित राजभवन के निवासी होने जा रहे हैं। दरअसल, राज्यपाल पद से रामनरेश यादव के सेवानिवृत्त होने के पहले लगभग तय हो गया था कि उनकी जगह गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन को बैठाया जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को भी इस आशय के संकेत मिल चुके थे लेकिन गुजरात में अमित शाह की दो रैलियों के बुरी तरह फ्लॉप होने और उनमें शाह के खिलाफ हुई नारेबाजी के लिए आनंदी बेन को जिम्मेदार माना गया और यही वजह उनके पुनर्वास में बाधक बन गई। उधर उत्तर प्रदेश भाजपा में पुराने सभी भाजपा नेताओं का पुनर्वास हो चुका है, सिर्फ लालजी टंडन ही बाकी है और चुनाव के मौके उनके जैसे नेता को खाली बैठाए रखना जोखिम भरा है, लिहाजा उनको मध्य प्रदेश भेजे जाने पर पार्टी और सरकार में लगभग सहमति बन गई है।

 

मोदी खुश नहीं हैं पार्टी के प्रवक्ताओं से!

भाजपा प्रवक्ताओं के प्रदर्शन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जरा भी संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें शिकायत है कि पिछले एक साल में सरकार और भाजपा पर मीडिया में जैसे हमले हुए हैं, पार्टी के तमाम प्रवक्ता उनका सही तरीके से प्रतिकार करने में नाकाम रहे हैं। पिछले साल दादरी कांड और उसके बाद बिहार चुनाव, रोहित वेमुला की खुदकुशी, गोरक्षा, जेएनयू कांड, दलित उत्पीड़न और कश्मीर में अशांति के ऐसे मामले हैं, जिनमें विपक्ष हमलावर रहा और मीडिया में भाजपा चौतरफा घिरी रही। इसीलिए जैसे ही उडी पर हुए आतंकवादी हमले के अगले दिन भाजपा के सभी प्रवक्ताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों के लिए एक अनौपचारिक कार्यशाला लगाई गई। अरुण जेटली रविशंकर प्रसाद, वेंकैया नायडू आदि वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने इस कार्यशाला में सभी प्रवक्ताओं को मीडिया में पार्टी और सरकार के खिलाफ आने वाली खबरों पर प्रतिक्रिया देने के कुछ गुर सिखाए। बताया जाता है कि इन दिग्गजों ने प्रवक्ताओं को यह नसीहत भी दी कि बचाव के लिए सिर्फ आक्रामक तेवर ही काफी नहीं होते बल्कि तथ्यों के साथ अपनी बात रखते भी आना चाहिए।

 

चुनाव में में फिल्मी सितारों का जमावड़ा

इस बार उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के अलावा सभी पार्टियां अपने प्रचार के लिए फिल्मी सितारों का मैदान में उतारने वाली है। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने 2007 में मुख्यमंत्री रहते हुए अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार के लिए अमिताभ बच्चन को उतारा था। लेकिन समाजवादी पार्टी बुरी तरह हारी। पिछले चुनाव में सपा ने फिल्मी सितारों से दूरी रखी। लेकिन इस बार फिर चुनाव से पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विद्या बालन को सरकार के प्रचार का चेहरा बनाया है। सरकार का प्रचार खत्म होने और आचार संहिता लागू होने के बाद सूबे में फिल्मी हस्तियों का जमावड़ा लगेगा। पिछली बार अमर सिह और जयाप्रदा सपा के साथ नहीं थे। लेकिन इस बार दोनों वापस आ गए हैं और जयाप्रदा पार्टी के स्टार प्रचारकों में रहेंगी। जया बच्चन भी सपा के लिए प्रचार करेंगी। भाजपा की ओर से हेमामालिनी, स्मृति ईरानी, भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता मनोज तिवारी और हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव के अलावा अजय देवगन और विवेक ओबरॉय के भी प्रचार में शिरकत करने की संभावना है। कांग्रेस की ओर से तो इस बार पार्टी की कमान ही अभिनेता राज बब्बर के हाथों में है। उनके अलावा मशहूर अभिनेत्री नगमा, महिमा चौधरी और भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता रवि किशन भी कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगे।

 

उत्तर प्रदेश मे कौन किसके साथ है?

उत्तर प्रदेश में दिलचस्प राजनीति हो रही है। पिछले लोकसभा चुनाव तक सिर्फ अरविंद केजरीवाल आरोप लगाते थे कि उत्तर प्रदेश में सब मिले हुए हैं। लेकिन इस समय उनकी वह और उनकी आम आदमी पार्टी सूबे के राजनीतिक परिदृश्य से पूरी तरह बाहर है और बाकी सभी पार्टियां एक दूसरे पर आरोप लगा रही हैं कि वे आपस में मिली हुई हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती का आरोप है कि सपा और भाजपा मिले हुए हैं और दोनों मिलकर बसपा को रोकना चाहते हैं, तो सपा का कहना है कि भाजपा और बसपा मिले हुए हैं। मुस्लिम वोटों को अपने साथ जोड़े रखने के लिए सपा के नेता प्रचार कर रहे हैं कि भाजपा और बसपा चुनाव से पहले भले ही साथ न आए लेकिन चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए साथ आने में वे कोई गुरेज नहीं करेंगे। विधानसभा चुनाव में अपना लोकसभा चुनाव वाला प्रदर्शन दोहरा कर सत्ता पर काबिज होने का ख्वाब देख रही भाजपा का आरोप अलग है। उसका कहना है कि भाजपा को रोकने के लिए सपा और कांग्रेस मिल कर काम कर रहे हैं। भाजपा के इसी आरोप का असर रहा कि उत्तर प्रदेश की सघन यात्रा कर रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस को भी निशाने पर लेना शुरू कर दिया है।

 

संसद के अगले दो सत्र समय से पहले!

इस बार संसद का शीतकालीन सत्र और बजट सत्र समय से पहले बुलाए जाने के संकेत हैं। अक्टूबर में गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में संसदीय मामलों की कैबिनेट कमेटी की बैठक के बाद इस आशय की सिफारिश की जाएगी। आमतौर पर शीतकालीन सत्र नवंबर के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है लेकिन इस बार यह पहले या दूसरे सप्ताह में ही बुलाने का सरकार का इरादा है। दरअसल केंद्र सरकार जीएसटी विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराना चाहती है कि ताकि एक अप्रैल 2017 से उसे लागू किया जा सके। शीतकालीन सत्र के बाद बजट सत्र होता है। इस बार सरकार फरवरी के आखिरी दिन के बजाय कुछ पहले ही बजट पेश उसे मार्च में ही पारित करा लेना चाहती है। अब तक की परंपरा के मुताबिक मई में बजट सत्र के दूसरे चरण में बजट पारित किया जाता है और उससे पहले के दो महीने के खर्च के लिए सरकार संसद से अनुदान की मंजूरी लेती है। सरकार इस परंपरा को खत्म करने के लिए बजट पहले पेश करके और पहले ही उसे पारित कराना चाहती है।

और अंत में

टीवी चैनलों में वॉर रूम बने! जी न्यूज ने लाहौर पर, आज तक ने गिलगित, बाल्तिस्तान और मुजफ्फराबाद...टाइम्स नाउ ने पेशावर पर, इंडिया टीवी ने ग्वादर पोर्ट पर, आईबीएन7 ने क्वेटा स्थिति परमाणु केंद्र पर इंडिया न्यूज ने कराची और न्यूज नेशन ने रावलपिंडी पर कब्जा कर लिया है। भीषण युध्द अभी भी जारी है!

 

 

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